
यात्रियों की मांग को देखते हुए हावड़ा-राजगीर-हावड़ा समर स्पेशल ट्रेन (03029/03030) को कहलगांव स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव दिया जाएगा। ट्रेन संख्या 03029 की यात्रा 16 मई से और ट्रेन संख्या 03030 की यात्रा 17 मई से शुरू होगी। दोनों ट्रेनें कहलगांव में क्रमशः 05:53 और 20:25 बजे ठहरेंगी।

18 दिन बाद राजगीर का ग्लास स्काई वॉक ब्रिज पर्यटकों के लिए फिर से खुल गया है। 27 अप्रैल से सुरक्षा और रखरखाव के कारण बंद था। अब पर्यटकों में भारी उत्साह है और उन्होंने पहले दिन ही पुल पर चलने का आनंद लिया। सभी राइड्स को सुरक्षित और बेहतर बनाया गया है।

राजगीर का मलमास मेला देवी-देवताओं के प्रवास का समय है, लेकिन इस दौरान काग महाराज नगरी छोड़ देते हैं। यह मान्यता है कि काग महाराज को महायज्ञ में निमंत्रण नहीं मिला था, जिससे वे नाराज हैं। एक महीने बाद ही वे वापस लौटते हैं।

राजगीर में एक बार फिर आस्था का महाकुंभ शुरू होने जा रहा है। विश्वप्रसिद्ध मलमास मेला 17 मई से 15 जून तक चलेगा। इस दौरान 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास होगा। श्रद्धालु पवित्र कुंडों में स्नान कर पुण्य कमाएंगे। ध्वजारोहण और देव पूजा से होगा श्रीगणेश।
बिहारशरीफ, निज संवाददाता। नव नालंदा सेवा भारती मलमास मेला में ब्रह्मकुंड के पास लगाएगी स्वास्थ्य शिविर नव नालंदा सेवा भारती मलमास मेला में ब्रह्मकुंड के पास लगाएगी स्वास्थ्य शिविर
किसी पन्ने का फ्लायर या बॉटम ले सकते हैं : पक्षियों का आश्रय स्थल बनीं राजगीर की वादियां पक्षियों का आश्रय स्थल बनीं राजगीर की वादियां
राजगीर मलमास मेले में इस बार 2.19 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। गर्मी की छुट्टियों के चलते अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना है। मेले में पहली बार अयोध्या के तर्ज पर श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मलमास मेले की शुरुआत 17 मई को प्रातः 6:30 बजे करेंगे। इस दौरान तीर्थ पूजन, आरती और ध्वजारोहण कार्यक्रम होगा। इसके बाद लक्ष्मीनारायण मंदिर और सप्तधारा परिसर में ध्वज पूजा की जाएगी। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से आएंगे और कुंड क्षेत्र की ओर सड़क मार्ग से जाएंगे।
राजगीर की वादियां पक्षियों के लिए आश्रय स्थल बन गई हैं। इस साल एक अध्ययन में यहां 200 प्रजातियों के पक्षियों की पहचान की गई। हाल ही में बांका जिले में यूरेशियन हॉबी का एक समूह देखा गया। ये पक्षी अपनी अद्भुत उड़ान शैली और शिकारी क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
राजगीर की वादियां पक्षियों का आश्रय स्थल बन गई हैं। मई की गर्मी में यहां पक्षियों की 200 प्रजातियां पाई गईं। हाल ही में बांका में यूरेशियन हॉबी का एक शिकारी पक्षी समूह देखा गया। पक्षी प्रेमी इसे आसमान का मालिक मानते हैं, जो अद्भुत गति और शिकारी क्षमता के लिए जाना जाता है।