
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 64 देशों के मैत्री समूह बनाए हैं और इनमें से कई मैत्री समूहों का हेड विपक्ष के नेताओं को बनाया गया है। इनमें केसी वेणुगोपाल, गौरव गोगोई, अभिषेक बनर्जी, राम गोपाल यादव और अखिलेश यादव जैसे नेता शामिल हैं।

लोकतंत्र में संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं होती। वह देश की सामूहिक चेतना, राजनीतिक परिपक्वता और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का आईना भी होती है। बार-बार का स्थगन, नारेबाजी, वेल में उतरना और अवरोध की राजनीति...

राहुल गांधी आज फिर पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक लेकर संसद पहुंचे। एक दिन पहले संसद में उन्होंने किताब की कुछ पंक्तियों को लेकर सरकार पर हमला बोला था। प्रकरण पर महाराष्ट्र सीएम फडणवीस ने पलटवार किया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस योजना की जगह नया कानून लाकर न केवल इसके नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार खत्म किया जा रहा है।
आईटी कंपनी की मदद से इसे 100 फीसदी सटीक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि मानसून सत्र से अनुवाद को पूरी तरह से एआई संचालित कर देंगे। इससे फायदा यह होगा कि अभी अनुवाद के कारण चार घंटे में कार्यवाही का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड होता है।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस बार का शीतकालीन सत्र बहुत छोटा था। इसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह गले के लिए अच्छा है। ज्यादा दिन चिल्लाना ठीक नहीं है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, प्रियंका गांधी का यह समावेशी तरीका उनकी मां सोनिया गांधी की राजनीतिक शैली की याद दिलाता है। वह पार्टी के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक टकराव बनने से पहले ही संभाल लेती हैं।
कपिल सिब्बल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारी संसद की प्रासंगिकता धीरे-धीरे कम हो रही है। अब कम बैठकें होती हैं और लोग सोचते हैं कि वहां कुछ नहीं होता है। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है, क्योंकि वास्तविक मुद्दों पर चर्चा नहीं की जाती है।'
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जी राम जी विधेयक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इस सत्र की समाप्ति महात्मा गांधी के अपमान से हुई। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से वायु प्रदूषण पर चर्चा की मांग की गई थी, लेकिन इसे अनसुना किया गया।
इसी दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सत्र थोड़ा और लंबा होता तो अच्छा होता। इस पर प्रधानमंत्री ने हंसते हुए जवाब दिया कि हमने इसीलिए छोटा सत्र रखा ताकि आपके गले में दर्द न हो। इतना सुनते ही वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे।