
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कोई भी कंपनी अब दुनिया की शीर्ष-100 मूल्यवान सूची में नहीं है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस की रैंकिंग में गिरावट आई है।

रांची, वरीय संवाददाता। वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को यात्रा खर्चों में कटौती करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के निर्देश दिए हैं। सभी बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित करने पर जोर दिया गया है। संगठन को इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद बढ़ाने का भी आदेश दिया गया है।

पश्चिम एशिया में भू राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से उद्योगों में चिंता बढ़ गई है। लोहा, स्टील, और एल्यूमिनियम की कीमतों में 35 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जिससे ऑटोमोबाइल और निर्माण उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का खर्च कम होने से आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ गई है।

इंडिया रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर को घटाकर 6.7 प्रतिशत करने का अनुमान जताया है। मांग और आपूर्ति में सुस्ती तथा वैश्विक अनिश्चितताएं मुख्य कारण हैं। इक्रा ने भी अनुमान घटाकर 6.2 प्रतिशत किया है। मुख्य चुनौतियों में भू-राजनीतिक तनाव और उच्च मुद्रास्फीति शामिल हैं।
मुंबई में रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 96.60 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और अंत में 96.52 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक जोखिम से बचाव के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। इस वर्ष रुपया 7 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने चेतावनी दी है कि दुनिया में व्यावसायिक तेल भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं। केवल कुछ हफ्तों का स्टॉक बचा है। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 25 लाख बैरल तेल बाजार में उतारा जा रहा है।
मुंबई में रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 54 पैसे टूटकर 96.35 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक अनिश्चितताएं और मजबूत डॉलर के कारण यह गिरावट आई। जानकारों का कहना है कि अमेरिकी बॉंड प्रतिफल और विदेशी निवेशकों की निकासी भी रुपया पर दबाव डाल सकती है।
पीडीडीयू नगर में तेल की कीमतों में उछाल से बुनकर संघ के अध्यक्ष राकेश कांत राय ने चेतावनी दी है कि इससे धागा और कपड़ों के निर्यात में महंगाई का असर होगा। ट्रांसपोर्टिंग खर्च बढ़ने से कारोबार प्रभावित होगा। प्रमुख उद्यमी विष्णुकांत अग्रवाल ने भी बताया कि आयात और निर्यात महंगे होंगे।
रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 प्रति डॉलर के नीचे जाकर 95.86 (अस्थायी) के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। जानकारों का मानना है कि रुपये में गिरावट जारी रहेगी।
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में