
हल्द्वानी में ‘चॉइस वेल्दी’ ने बीमा और म्यूचुअल फंड सलाहकार सेवा में एक वर्ष की सफलता का जश्न मनाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कंपनी की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने वित्तीय सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने और सही निवेश पर जोर दिया।

SEBI New Rules: सेबी ने पहले एक खाते में नॉमिनी की अधिकतम संख्या तीन से बढ़ाकर 10 करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसे वापस ले लिया गया है। अब निवेशक पहले की तरह अधिकतम तीन नॉमिनी ही रख सकेंगे।

SIP Investment: अगर कोई व्यक्ति लगातार 30 साल तक 15000 रुपये म्यूचुअल फंड्स में हर महीने निवेश करता है तो वह आसानी से करोड़पति बन जाएगा। लॉन्ग टर्म में औसतन 12 प्रतिशत का रिटर्न म्यूचुअल फंड से मिलता है।

How choose good SIP: लॉन्ग टर्म में एसआईपी के जरिए मोटा रिटर्न बनाया जा सकता है। आज के समय में अच्छे फंड हाउस 12 प्रतिशत तक का रिटर्न लॉन्ग टर्म में देने में सफल हो रहे हैं।
How To choose Best SIP: एसआईपी करने से पहले फंड्स की पड़ताल करना फायदेमंद रहता है। रोजाना 100 रुपये की एसआईपी के जरिए भी करोड़पति बना जा सकता है।
EPFO ने नौकरीपेशा कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे रिटायरमेंट के लिए जमा EPF का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में निवेश न करें। संगठन का कहना है कि EPF केवल बचत नहीं बल्कि पेंशन, बीमा और टैक्स लाभ देने वाली सामाजिक सुरक्षा योजना है, जबकि म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़ा निवेश विकल्प है।
SIP Investment: लॉन्ग टर्म में SIP के जरिए बड़ा फंड बनाया जा सकता है। अच्छे म्यूचुअल फंड्स लॉन्ग टर्म में 12 प्रतिशत तक का रिटर्न देने में सफल हो रहे हैं।
वाराणसी में ठुकराल कैपिटल मार्केट द्वारा वित्तीय साक्षरता और निवेश संस्कृति पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें 100 से अधिक फंड हाउस और विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य यूपी के छोटे शहरों में म्यूचुअल फंड निवेश को बढ़ावा देना था। पूर्व एडिशनल कमिश्नर रामाश्रय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
सेबी ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाया है। अब डीमैट खातों में रखी गई म्यूचुअल फंड यूनिट के लिए नियमित निकासी (एसडब्ल्यूपी) और निवेश स्थानांतरण (एसटीपी) के लिए पहले से निर्देश दिए जा सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल उन निवेशकों के लिए उपलब्ध थी जिनकी यूनिट 'स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट' रूप में होती थीं।
म्यूचुअल फंड निकाय एम्फी ने निवेशक के निधन के बाद निवेश हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए नाम, पते एवं हस्ताक्षर में असंगति से जुड़े नियमों में ढील दी है। नए प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जिससे मृत यूनिटधारकों के नामित व्यक्तियों को निवेश राशि का दावा करना सरल होगा।