
Next Blue Moon in 2008: 31 मई 2026 को दिखने वाले ब्लू मून के बाद अगला ब्लू मून कब दिखाई देगा? जानिए इसकी सटीक तारीख, ब्लू मून क्या होता है और यह खगोलीय घटना क्यों मानी जाती है खास।

Blue Moon 2026 Today: आज ब्लू मून के मौके पर चंद्रमा को जल अर्पित करने का सही तरीका जानें। साथ ही जानिए जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए और इस उपाय का क्या महत्व माना जाता है?

Blue Moon Rashifal Purnima: अधिक मास की पूर्णिमा पर ब्लू मून काअद्भुत नजारा देखने को मिलेगा, जो कुछ राशियों की किस्मत चमका सकता है। ऐसे में आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि क्या वाकई में चांद नीला नजर आएगा? आइए जानते हैं-

अधिकमास का व्यातिपात योग बन रहा है। यह क्या होता है और इसके बनने से किन राशियों को लाभ और नुकसान होगा, आज हम आपको ये बताएंगे। व्यातिपात योग क्या होता है, यह हम आपको विस्तार से बता रहे हैं,
विष योग जैसा कि इसके नाम से ही समझ आ रहा है कि विष के समान बनने वाला योग।ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा व शनि की युति से बनने वाले योग को विष योग कहते हैं। जब चंद्रमा और शनि एक दूसरे के साथ एक ही राशि में आते हैं,
आर्टेमिस-II मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर यात्रा कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से यह अनोखा दृश्य कैद किया। इस तस्वीर में नीले रंग की पृथ्वी सफेद बादलों के साथ दिखाई देती है।
इसरो के अनुसार, यह उपग्रह हर 12 दिनों में भारत के पूरे भू-भाग का उच्च रिजॉल्यूशन (100 मीटर) डेटा प्रदान करेगा। इससे किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार को मिट्टी की नमी की लगभग वास्तविक समय की जानकारी मिल सकेगी।
Aaj Ka Panchang 5 February 2026, Panchang Today : हिन्दू पंचांग का उपयोग प्राचीन काल से होता आ रहा है। पंचांग शब्द का अर्थ है , पांच अंगो वाला। पंचांग में समय गणना के पांच अंग हैं- वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। आइए जानते हैं आज के शुभ, अशुभ मुहूर्त…
Sakat Chauth Vrat : आज यानी 6 जनवरी 2026 को देशभर में सकट चौथ का पावन व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। यह व्रत खास तौर पर संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति के लिए किया जाता है। सकट चौथ को कई जगह संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।
Aaj Chand Nikalne Ka Time: आज यानी 6 जनवरी 2026 को देशभर में सकट चौथ का पावन व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। इस व्रत में चंद्र दर्शन सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि चांद को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।