
आगामी नया साल में मलमास के कारण दो ज्येष्ठ माह होंगे। सौराठ सभा 2 से 12 जुलाई तक चलेगी, जिसमें विवाह लग्न 2, 3, 6, 9 और 12 जुलाई को निर्धारित किया गया है। पंडित प्रमोद मिश्र ने बताया कि मलमास 16 मई से 16 जून तक रहेगा, जिसके दौरान शुभ कार्य वर्जित रहेंगे।

बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती सजल झा एवं श्रीमती पिंकी कुमारी ने मधुबनी स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी एवं केंद्र प्रशासक ने सदस्यों का स्वागत किया। निरीक्षण के दौरान महिलाओं के विकास योजनाओं और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

हरलाखी में गैस सिलेंडर की किल्लत से लोग परेशान हैं। वितरकों ने होम डिलवरी बंद कर दी है, जिससे महिलाएं एजेंसी के चक्कर काटने पर मजबूर हैं। गैस के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं और 45 दिनों के अंतराल पर बुकिंग हो रही है। इससे कामकाजी लोगों को बहुत समस्या हो रही है।

मधुबनी में 20 और 21 मार्च को मिथिला महोत्सव-2026 का आयोजन होगा। इसमें स्थानीय और राष्ट्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। प्रतियोगिताएं और स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जिनमें मिथिला पेंटिंग, पारंपरिक व्यंजन और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल होंगी। महोत्सव का उद्घाटन 20 मार्च को होगा।
मधुबनी पेंटिंग अब ईद के चांद और इस्लामी प्रतीकों के साथ नई थीम में उभर रही है। कलाकारों को देश-विदेश से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। पिछले एक महीने में कुवैत, सऊदी अरब, और अन्य देशों से 35 लाख रुपये की डिमांड मिली है। यह पहल सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देती है।
मधेपुर के प्रदीप कुमार महतो और राघव कुमार झा को पटना में एसडीआरएफ द्वारा आपदा मित्र के रूप में सम्मानित किया गया। उन्हें सात दिवसीय आपदा मित्र प्रशिक्षण में भाग लेने के बाद यह सम्मान मिला। मधेपुर प्रखंड हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है, जिससे ऐसे प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता रहती है।
मधुबनी की क्रिकेट खिलाड़ी कुमारी अवंतिका ने पटना में अंडर-15 जोनल क्रिकेट ट्रायल में भाग लेकर जिले का नाम रोशन किया है। अवंतिका एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं और उनके प्रयासों से जिले के खेलप्रेमियों में खुशी का माहौल है। उन्होंने ट्रायल में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है।
सुपौल जिले के युवा मैथिली साहित्यकार महेन्द्र को उनकी कृति 'धात्री पात सन गाम' के लिए साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला है। यह उपलब्धि मैथिली भाषा और मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा के लिए गर्व का क्षण है। साहित्यिक जगत में बधाइयों का दौर शुरू हो गया है और इसे मिथिलांचल की साहित्यिक प्रतिष्ठा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
28 मार्च को मधुबनी में 'जीवन-मरण' उपन्यास के हिंदी अनुवाद का लोकार्पण हुआ। यह अनुवाद प्रसिद्ध कवि डॉ. शुभ कुमार वर्णवाल द्वारा किया गया है। इस साहित्यिक उत्सव में कई प्रमुख साहित्यकारों ने भाग लिया और इस कार्य की सराहना की।
मधुबनी की मासिक गोष्ठी में कई रचनाकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। भोलानंद झा की अध्यक्षता में आयोजित इस गोष्ठी में महिलाओं के प्रति सम्मान और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाया गया। कवि दयाशंकर मिथिलांचली ने सभी का स्वागत किया और रचनाओं में प्रेम, परिवार, और सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डाला।