
नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर शुरू हुआ आन्दोलन बिहार के विभिन्न जिलों में तेजी से फैलता जा रहा है। गुरुवार को पटना के बाद कटिहार, दरभंगा और बेगूसराय में उग्र प्रदर्शन और तोड़ फोड़ हुए।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब के हजारों किसान दिल्ली की ओर कूच कर गए हैं। हालांकि शंभू बॉर्डर को सील कर दिया गया है। किसानों का कहना है कि हरियाणा की सरकार अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला कर रही है।

बिहार में बसाई जाने वाली 12 सैटेलाइट टाउनशिप पर सम्राट सरकार की मुश्किल बढ़ गई है। किसान संगठनों ने इसका विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दे दी है। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 22 जुलाई को विरोध प्रदर्शन का ऐलान भी कर दिया गया है।

भोपा गांव धीराहेडी में भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बैनर तले सदस्यता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंचायत में किसानों की समस्याओं और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा की गई। राकेश टिकैत ने स्मार्ट मीटरों के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि संगठन किसानों के हितों के लिए लड़ता रहेगा।
रामपुर रेलवे स्टेशन से 11 मार्च को दिल्ली की स्पेशल टीम ने किशोर को पकड़ा। पूछताछ के दौरान कई संदिग्धों के नाम सामने आए। किशोर का मोबाइल ट्रेस करके उसे पकड़ा गया। उसकी रिमांड पर पूछताछ चल रही है। यह किशोर किसान आंदोलन में भी शामिल था, जहाँ उसने पुलिस के ड्रोन को गिराया था।
डल्लेवाल किसान आंदोलन 2.0 का सबसे प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी जैसी मांगों को लेकर पिछले साल 26 नवंबर से 9 अप्रैल तक (131 दिन) लंबा अनशन किया था।
किसान नेता राकेश टिकैत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। गाजियाबाद की एक विशेष अदालत ने 11 साल पुराने एक मामले में राकेश टिकैत समेत 36 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। क्या है पूरा मामला? इस रिपोर्ट में जानें…
डल्लेवाल ने कहा कि किसानों की मांग पर अनशन खत्म किया है। काफी समय से किसान उन्हें अनशन तोड़ने की अपील कर रहे थे। डल्लेवाल ने किसानों की मांगों को लेकर 26 नवंबर 2024 से अनशन पर थे।
डल्लेवाल ने कहा कि किसानों का आंदोलन जारी रहेगा, क्योंकि इसी आंदोलन के दबाव के चलते संसद की कृषि विषयों पर बनी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में एमएसपी गारंटी कानून बनाने की सिफारिश की।
किसानों का आरोप है कि पंजाब सरकार ने उनके साथ जबरदस्ती की है। क्योंकि किसान अपनी मांगों को लेकर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर शांत तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे।