
खरमास के बाद शादी बाजार में रौनक लौट आई है। 5 फरवरी से शादी का लग्न शुरू हो रहा है। सोने के भाव में उतार-चढ़ाव से खरीदारी का पैटर्न बदल रहा है। हल्के वजन की ज्वैलरी और 18 कैरेट वाले सोने के गिफ्ट की मांग ज्यादा है।

हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास समाप्त हो गया है, लेकिन इसके बावजूद अभी शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। दरअसल, खरमास खत्म होने के बाद भी कुछ समय तक शुभ योग और विवाह मुहूर्त नहीं बन रहे हैं, जिस वजह से लोग शादी की तारीख तय नहीं कर पा रहे हैं।

नीतीश सरकार में मंत्री संजय सिंह ने दावा किया है कि खरमास के बाद बिहार कांग्रेस के सभी 6 विधायक पाला बदलकर एनडीए में आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक अभी एनडीए नेताओं के संपर्क में हैं।

हिंदू पंचांग और ज्योतिषशास्त्र में खरमास का विशेष महत्व बताया गया है। जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब इस अवधि को खरमास कहा जाता है। परंपरा के अनुसार खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

मंगलवार से खरमास की शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। हालांकि सात दिसंबर से ही इस वर्ष का शादी-विवाह का मुहूर्त समाप्त हो गया।अब 14 जनवरी मकर संक्रांति के साथ ही मांगलिक कार्य की शुरुआत होगी।

Surya Gochar in December 2025 dhanu sankranti: गुरु की राशि धनु में सूर्य 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार तक रहकर चराचर जगत पर अपना प्रभाव स्थापित करेंगे और इसी के साथ खरमास का समापन हो जाएगा तथा सूर्य देव अपनी उत्तरायण की यात्रा भी आरंभ कर देंगे।

खरमास 16 दिसम्बर मंगलवार को दिन में 01.24 बजे से आरंभ होने के कारण आगामी चौदह जनवरी तक शहनाईयों की गूंज जिले की फिजाओं में सुनाई नहीं देगी। महावीर व अन्नपूर्णा पंचांगों के अनुसार मूल नक्षत्र व धनु राशि की सूर्य संक्रांति 16 दिसंबर मंगलवार को दिन में 01:24 बजे से होगी।

Surya gochar dhanu rashi: 2025 में शादी का आखिरी मुहूर्त दिसंबर में है, इसके बाद अगले साल ही विवाह योग्य तिथियां मिलेंगी। खरमास 16 दिसंबर से शुरू होगा, इस दिन सूर्य धनु राशि में जाएंगे, इसे धनु संक्रांति कहते हैं।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ पर बैठ कर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा के दौरान सूर्य का रथ एक क्षण के लिए भी नहीं रुकता। निरंतर चलने और सूर्य के तेज से घोड़े प्यास तथा थकान से व्याकुल होने लगे।

हिंदू पंचांग के अनुसार साल में दो बार ऐसा समय आता है जब सूर्य देव अपनी चाल बदलते हुए धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इसी अवधि को खरमास कहा जाता है। यह समय धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दिसंबर माह में सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो साल के अंत में भी खरमास लगता है।