
शरण पंपवेल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से छात्रों और युवाओं के एक वर्ग में नाराजगी पैदा हुई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्र अब इस नीति के विरोध में भगवा गमछा लेकर स्कूलों और कॉलेजों में जाने की योजना बना रहे हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ किया है कि स्कूलों में हिजाब की अनुमति होगी लेकिन भगवा शॉल पहनने पर पाबंदी बरकरार रहेगी। बीजेपी ने इस फैसले को 'तुगलकी फरमान' और 'वोट बैंक की राजनीति' करार दिया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन के दौरान, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा था कि हिजाब एक ज़रूरी धार्मिक परंपरा नहीं है। बाद में उच्चतम न्यायालय के उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रहा था, जिससे यह पाबंदी लागू रही।

इस घटनाक्रम ने कर्नाटक सरकार को 5 फरवरी 2022 को एक आदेश जारी करने के लिए मजबूर किया, जिसमें कर्नाटक शिक्षा अधिनियम 1983 के तहत शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक वस्त्रों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।