
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को कालभैरव का आविर्भाव हुआ था। इस दिन पूजा, मंत्रजप और हवन करने से लाभ मिलता है। इस साल12 नवंबर को कालभैरव जयंती मनाई जा रही है।

kalashtami:मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर 12 नवंबर को काशी के भैरव मंदिरों में उनका जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस निमित्त भैरव मंदिरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

Kaal Bhairav Puja:आप सिर्फ समय का खिलौना हैं। आपको काल भैरव के उस आयाम तक जाना है, जब आप समय के स्वामी बन सकें। यदि आप समय के स्वामी बन गए हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप जीवन और जीवन-प्रक्रिया के भी स्वामी बन गए हैं।