
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और ओमान के बीच में एक डील फाइनल हुई है। इस डील के मुताबिक ईरान, बाहर से होर्मुज में आने वाले जहाजों का मामला संभालेगा। वहीं, ओमान खाड़ी से होर्मुज के रास्ते बाहर जा रहे जहाजों के नेविगेशन का जिम्मा संभालेगा।

अमेरिका के सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान की बिलियन्स डॉलर की संपत्तियों को जारी कर दिया है। इसके अलावा युद्ध के पहले से ही यूएई के बैंकों में पड़ा 2 टन ईरानी सोने को भी तेहरान भेज दिया गया है।

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर अमेरिका के सामने अपनी मुख्य मांगें रख दी हैं। इसमें सबसे प्रमुख अमेरिका को ईरान के साथ हुए युद्ध का हर्जाना देने की मांग की गई है। इन मांगों पर अभी तक अमेरिका की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई की गंभीर हालत की चर्चा के बीच उनका एक वीडियो वायरल हुआ है। ईरानी न्यूज एजेंसी की तरफ से पोस्ट किए गए इस वीडियो में मोजतबा सही सलामत नजर आ रहे हैं। हालांकि, उनका यह वीडियो पुराना बताया जा रहा है।
जनरल ग्रिनकेविच ने स्पष्ट किया है कि अगर नए युद्धपोत नहीं मिलते हैं, तो उन्हें इजरायल की सुरक्षा के बजाय खुद अमेरिका की मुख्य भूमि की रक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
ईरान ने पश्चिम एशिया के कुछ बड़े ऊर्जा संयंत्रों की लिस्ट जारी की है। तेहरान की तरफ से कहा गया कि अगर अमेरिका ने उसके ऊर्जा संयंत्रों पर हमला किया, तो वह इन ऊर्जा संयंत्रों को भी तबाह कर देगा। इस लिस्ट में सऊदी अरब, कुवैत, कतर, इजरायल के बड़े ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं।
पश्चिम एशिया में जारी ईरान और अमेरिका युद्ध में अब ड्रैगन की एंट्री होने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती होर्मुज और बॉव अल मंडेब में बढ़ते खतरे के बीच खाड़ी देशों ने चीन को इस मामले में हस्तक्षेप करने का निमंत्रण दिया है।
केशम द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबर फैलते ही वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है। इससे तेल की कीमतों में उछाल आया है। हमलों के बाद वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतों में 8% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है।
अमेरिका ने ईरान पर होने वाले हमलों को रोक दिया है। 13 दिन तक जमकर ईरान के ऊपर बमबारी करने वाले अमेरिका ने अब अपने हमलों को थाम लिया है।रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला शुक्रवार को वाइट हाउस में हुई एक बैठक के बाद लिया गया।
Pakistan news: ईरान में जारी जंग के बीच पाकिस्तान खाड़ी देशों के लिए सुरक्षा का एक बड़ा विकल्प बनकर सामने आया है। अमेरिका के साथ बढ़ती अविश्वसनियता ने खाड़ी देशों को इस्लामाबाद की तरफ देखने के लिए मजबूर किया है। सऊदी अरब के बाद अब कुवैत भी पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते की तरफ देख रहा है।