
हलषष्ठी पर क्यों नहीं चलाया जाता खेतों में हल? जानिए भगवान बलराम के 'हलधर' कहलाने के पीछे का पौराणिक कारण, हलछठ व्रत के नियम, तिन्नी के चावल का फलाहार और पूजन परंपरा।

harchhat vrat katha in hindi: आज हरछठ है, इसे हल षष्ठी व्रत भी कहते हैंष इस दिन बलराम जो श्रीकृष्ण के भाई हैं, उनका जन्म हुआ था। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। व्रत में कथा सुनती हैं। आइए पढ़ें कथा

Hal Shashthi Vrat:इस प्रकार रोहिणी के पुत्र के रूप में बलराम का जन्म हुआ। गर्भ के इस संकर्षण के कारण बलराम का एक नाम संकर्षण भी है। इसके अलावा इन्हें बलभद्र, हलधर, हलायुध, बलदेव, दाऊ, रोहिणेय और अनंत नाम से भी जाना जाता है।

Harchhath vrat: इस साल हल षष्ठी व्रत सितंबर में किस दिन रखा जाएगा। इस दिन कैसे पूजा होती है और क्यों रखा जाता है व्रत यहां पढ़ें हर बात
Harchath vrat today:ललही षष्ठी या हलषष्ठी व्रत 14 अगस्त को आस्था के साथ मनाया जाएगा। माताएं व्रत रहकर संतान के दीर्घायु की कामना व पूजा-अर्चना कर करेंगी। इसे भगवान बलराम, गणेश और गौरी और षष्ठी देवी को अर्पित किया जाता है।
ललही छठ या हल षष्ठी यह व्रत संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए किया जाता है। ललही छठ को हलषष्ठी भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह गौरी-गणेश की पूजा करती हैं। यहां पढ़ें इस व्रत की कथा:
harchath vrat date 2025: हरछठ का व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्मोत्सव है। इस दिन माताएं संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।
Harchath vrat Kab hai:भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हरछठ का व्रत रखा जाता है। इस साल हरछठ हलषष्ठी व्रत 14 अगस्त को रखा जाएगा। दरअसल इस साल षष्ठी तिथि सुबह 4.23 मिनट पर शुरू हो रही है। इसलिए उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 14 अगस्त को रखा जाएगा।
Hal chhath par chhath mata ki pujaइस दिन भगवान श्रीकृष्ण के भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। बलरामजी का प्रमुख शस्त्र हल और मूसल है। इसलिए उन्हें हलधर कहते हैं। उन्हीं के नाम पर इस पर्व का नाम हलषष्ठी पड़ा।
harchat ki kahani, halshashthi vrat katha:हरछठ का व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। महिलाएं अपनी संतानों की दीर्घायु के लिए हलषष्ठी व्रत रखती हैं।