
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में चार मूर्ति/गौड़ चौक से तिगरी गोलचक्कर के बीच सड़क के दोनों तरफ की सर्विस रोड चौड़ा की जा रही है। सर्विस रोड के चौड़ा होने से गाजियबाद आने-जाने वालों के साथ ही गौर सिटी-1, 2 और आसपास की 20 से अधिक सोसाइटियों में रहने वालों को भी सुविधा होगी।

श्रमिकों के लिए अच्छी खबर है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में श्रमिकों के लिए 2500 से अधिक किफायती फ्लैट बनाने की तैयारी है। प्राधिकरण ने इसके लिए के पतवाड़ी गांव के पास पांच एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के 16 गांवों की सभी गलियों का अंधेरा दूरकर एलईडी स्ट्रीट लाइट से रोशन किया जाएगा। इसके लिए टेंडर जारी कर कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं।

ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने अवैध कॉलोनाइजरों और बिल्डरों के खिलाफ सख्त अख्तियार कर लिया है। प्राधिकरण ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के खोदना कलां और वैदपुरा गांवों में बन रहे करीब 300 फ्लैटों को सील कर दिया।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई-1 आईटीबीपी गोलचक्कर से नटो की मड़ैया तक की सड़क को छह लेन का किया जाएगा। इस रास्ते पर स्थित ऐच्छर टी पॉइंट को बंद कर दो यूटर्न बनाए जाएंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सर्वेक्षण के बाद इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए 130 मीटर चौड़ी सड़क को सीधे जोड़ने के लिए एक नई सड़क का निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। ऐस सिटी गोलचक्कर सेक्टर-तीन के पास से शुरू होने वाली 80 मीटर चौड़ी इस सड़क का काम तीन माह में पूरा होगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चार मूर्ति चौक और तिगरी के बीच दो नए यू-टर्न का काम तेज हो गया है। जुलाई तक शुरू होने वाले इन यू-टर्न और चौड़ी सर्विस रोड से गौड़ सिटी समेत 20 सोसाइटियों के 1 लाख निवासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के रूट पर मेट्रो का काम शुरू होने में फिर अड़चन आ गई है। इसका टेंडर अब तक जारी नहीं हो पाया है। इसका खुलासा शुक्रवार को संसद में राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र नागर के भाषण से हुआ।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम की समस्या को दूर करने की कवायद तेज कर दी गई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने यहां की पांच प्रमुख सड़कों को चौड़ा करने के लिए टेंडर जारी कर कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। इस काम पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे।
मियावाकी वृक्षारोपण पद्धति के जरिए शहरों में कम समय में घने जंगल बनाए जा सकते हैं जबकि परंपरागत तरीके से काफी समय लग जाता है। मियावाकी पद्धति से कुछ ही साल में घना जंगल बसाया जा सकता है।