
आरोपियों ने SBI और बैंक ऑफ महाराष्ट्र से ऋण प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया। उन्होंने संपत्तियों के मालिकाना हक और स्थिति का गलत प्रतिनिधित्व किया। विवादित भूमि शीर्षकों से जुड़े अहम तथ्यों को छिपाया।

प्रवर्तन निदेशालय के निवेश धोखाधड़ी केस में वांछित शाइन सिटी ग्रुप के प्रमोटर राशिद नसीम को यूएई के दुबई में गिरफ्तार किया गया। लखनऊ की अदालत पहले ही उन्हें भगोड़ा घोषित कर 127.98 करोड़ की संपत्ति जब्त करने का आदेश दे चुकी है।

उनके आवास से 2.06 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और 2.67 करोड़ रुपये की भारतीय नकदी बरामद की गई। DRI ने इस मामले में उन पर पहले ही 102 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।

एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने पूर्व एक्ट्रेस हर्षवर्दिनी रान्या और कुछ अन्य के समेत गोल्ड स्मगलिंग केस में चार्जशीट दर्ज की है। यह तस्करी मार्च 2024 से 2025 के बीच हुई है।
ED ने अपनी जांच तब शुरू की जब दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने 2020 में न्यूज़क्लिक और उसके फाउंडर के खिलाफ कथित तौर पर विदेश से मिले पैसे के संबंध में केस दर्ज किया था।
अमरिंदर सिंह और उनके बेटे को विदेशों में संपत्ति के मामले में समन जारी होने के तुरंत बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में वापस आने का खुला ऑफर दे दिया। पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा था कि कैप्टन अगर आना चाहें तो हाईकमान विचार कर सकता है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से जुड़े बहुचर्चित मामले में शनिवार को पूर्व विधायक बलजीत यादव को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ईडी रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें जयपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां लंबी बहस के बाद अदालत ने उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए।
राजस्थान में क्रिकेट और बैडमिंटन किट खरीद से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि बहरोड़ विधानसभा से पूर्व विधायक रहे
बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एमएलए लोकल एरिया डेवलपमेंट (LAD) फंड से जुड़ी कथित 3.72 करोड़ रुपये की धांधली के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई जयपुर क्षेत्रीय इकाई की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई।
प्रवर्तन निदेशालय ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ धनशोधन मामले में आरोपपत्र दायर किया है। यह मामला उस समय शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय द्वारा गलत मान्यता का दावा करने की प्राथमिकी दर्ज की थी। ईडी ने सिद्दीकी को गिरफ्तार किया और संपत्तियों को कुर्क किया।