
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रमुख अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को रुपये के गिरावट पर हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि एक डॉलर के बराबर 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को नीति निर्धारण का आधार न बनाएं।

क्या सच में भारतीय रुपया पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश की करेंसी के मुकाबले गिर गया है? जानिए पिछले 10 साल में रुपये की ऐतिहासिक गिरावट का असली सच और इसके मुख्य कारण।

Rupee Rally: भारतीय रुपया आज 36 पैसे की तेजी के साथ 92.64 प्रति डॉलर पर खुला। यह उछाल कमजोर होते डॉलर, गिरते कच्चे तेल और एशियाई बाजारों में आई तेजी का संयुक्त असर माना जा रहा है।

आमतौर पर संकट के समय लोग सोने में निवेश करते हैं, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में निवेशक डॉलर को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और ब्याज दरें ऊंची रहने से डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि सोने में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। हिन्दुस्तान ब्यूरो की स्पेशल रिपोर्ट…
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सोमवार को पहली बार 95 का स्तर पार कर गया। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की निकासी जारी रहती है तो रुपया 98 के स्तर को भी छू सकता है।
Dollar Vs INR: आज डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में तेजी देखने को मिल रही है। रुपया 1.3 प्रतिशत की तेजी के साथ 93.59 पर आ गया है। इस तेजी के पीछे आरबीआई का एक स्टेप है। बता दें भारत में रुपये की लगातार गिरावट को देखते हुए RBI ने बड़ा कदम उठाया है।
रुपया 3 पैसे गिरकर 92.92 पर खुला और बाद में 93.08 तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा देती है। आइए समझते हैं कि रुपये में गिरावट क्यों होती है और इसका असर आप पर कैसे पड़ता है।
Rupee hit New low lavel: पहली बार रुपया 92 रुपये के स्तर को भी क्रॉस कर गया। एक डॉलर की कीमत 0.80 प्रतिशत की गिरावट के बाद 92.30 रुपये के स्तर तक लुढ़क गया था। इससे पहले इसी साल रुपये का रिकॉर्ड लो लेवल 91.9875 रुपये था।
Dollar Vs Ruble: इस साल रूसी रूबल ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 45% की वृद्धि की है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच एक अप्रत्याशित सफलता है। रूबल की मजबूती ने आर्थिक चुनौतियों को जन्म दिया है, लेकिन यह महंगाई नियंत्रण में भी सहायक साबित हो रहा है।
Bitcoin: बिटकॉइन अगले 10 साल में अमेरिकी डॉलर की ग्लोबल रेस को पलट देगा और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की मुख्य मुद्रा बन जाएगा। यह 250000 डॉलर के पार जा सकता है।