
ज्योतिषपीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की शीतकालीन यात्रा का अंतिम पड़ाव देवप्रयाग में हुआ। यहां उन्होंने मां गंगा और भगवान रघुनाथ का विशेष पूजन किया। तीर्थ पुरोहित समाज ने उनका पादुका पूजन कर अभिनंदन पत्र भेंट किया। शंकराचार्य ने संस्कृत के महत्व पर भी जोर दिया।

बीकेटीसी और कालीमाई पंचगांई समिति द्वारा सिद्धपीठ कालीमाई की देवरा यात्रा शुरू की गई है। मां काली की डोली घर-घर जाकर भक्तों से मिल रही है। यात्रा 13 जनवरी को देवप्रयाग पहुंचेगी और 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर स्नान करेगी। यह यात्रा चार वर्षों तक चलेगी और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है।

देवप्रयाग में जगदगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की शीतकालीन यात्रा का समापन हुआ। बदरीनाथ तीर्थपुरोहित समाज ने उनका पादुका पूजन कर अभिनंदन पत्र भेंट किया। उन्होंने उत्तराखंड में सफल यात्रा के लिए मां गंगा और भगवान रघुनाथ का विशेष पूजन किया और संस्कृत के महत्व पर भी जोर दिया।

देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने बुधवार को कीर्तिनगर के डांग धारी मोटरमार्ग के हाट मिक्स कार्य का भूमि पूजन किया। यह कार्य 6 करोड़ 97 लाख 35 हजार रुपये की लागत से 17 किमी तक किया जाएगा। विधायक ने मूलभूत सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

देवप्रयाग नगर में आयोजित हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ भारत माता और गो माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। मुख्य वक्ता मिथिलेश ने ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ विषय पर बात करते हुए नागरिकों से सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। सम्मेलन का समापन राष्ट्र निर्माण और समाज सुधार के संकल्प के साथ हुआ।

नई टिहरी व चंबा में गुलदार की धमक, तो देवदार में दिन-दहाड़े भालू दिखा भालू व गुलदार की धमक से आम लोगों में दहशत

बदरीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों के गांव कोटी में चित्रकूट बालाजी हनुमान मंदिर का 27वां मूर्ति स्थापना दिवस श्रद्धा-भक्ति से मनाया गया। इस मौके पर अखण्ड

उत्तराखंड के देवप्रयाग में अक्षर योग केंद्र के संस्थापक हिमालयन सिद्ध अक्षर महाराज के मार्गदर्शन में लगभग 80 साधकों ने योग और आध्यात्मिक साधना की। साधकों ने अलकनंदा और भागीरथी के संगम पर ध्यान और अभिषेक किया। सिद्ध महाराज ने देवप्रयाग की पवित्रता और शांति को बनाए रखने का महत्व बताया।

देवप्रयाग में अक्षर योग केंद्र के संस्थापक हिमालयन सिद्ध अक्षर महाराज के मार्गदर्शन में विश्वभर से करीब 80 साधकों का समूह एकत्रित हुआ। साधकों ने अलकनंदा और भागीरथी के संगम पर योग और आध्यात्म की साधना की। साधना के बाद भगवान शिव का अभिषेक किया और श्री रघुनाथ मंदिर के दर्शन किए।

देवप्रयाग में पूर्व विधायक दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि दी गई। विभिन्न संगठनों ने भट्ट के राज्य आंदोलन में योगदान को याद किया। गणेश भट्ट ने उनकी प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। भट्ट ने उत्तराखंड के भूमि कानून और राजधानी गैरसैंण के लिए संघर्ष किया। युवाओं को भट्ट के सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई।