
रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने दीपक प्रकाश को विधान पार्षद बनवाकर सम्राट चौधरी सरकार में बेटे का मंत्री पद मार्च तक बचा लिया है। भाजपा में दल के विलय का दबाव झेल रहे कुशवाहा का रुख सात महीने बाद की राजनीति तय करेगा।

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने गुरुवार को एमएलसी पद की शपथ दिलाई। बिहार के पंचायती राज मंत्री पहली बार किसी सदन के सदस्य बने हैं।

बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाए जाने पर उपेंद्र कुशवाहा ने पीएम मोदी, अमित शाह, नीतीश कुमार, नितिन नवीन, सम्राट चौधरी, चिराग पासवान और जीतनराम मांझी को थैंक्यू कहा है।

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को राज्यपाल ने एमएलसी के रूप में मनोनीत कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले दीपक का मंत्री पद सुरक्षित हो गया है। बिना विधायक या एमएलसी बने मंत्री पद पर बने रहने को लेकर अदालत ने सम्राट सरकार से सवाल किया था।
भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे पर आईआईपी के विधायक आईपी गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि कि दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के कितने ही मौके आए थे, मगर भाजपा ने एक भूमिहार नेता की बलि दे दी।
मंत्री दीपक प्रकाश के लिए बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले देवेश कुमार भाजपा के मिजोरम प्रभारी हैं। चार साल पहले शराब पीने के एक मामलों से वह विवादों में आए थे। सदन में वह एक बार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से भी भिड़ गए थे।
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बिहार की सम्राट सरकार में मंत्री बने रहेंगे। उनके लिए भाजपा एमएलसी देवेश कुमार ने विधान परिषद की सीट छोड़ दी है। देवेश ने विधान परिषद की सदस्यता से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। अब इस सीट से दीपक को एमएलसी बनाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सम्राट चौधरी सरकार से पूछा है कि दीपक प्रकाश कैसे मंत्री पद पर बने हुए हैं, जबकि शपथ लेने के 6 महीने बाद भी वे विधान सभा या परिषद के मेंबर नहीं बन पाए हैं।
बिहार विधानमंडल के मौजूदा मानसून सत्र का आज तीसरा दिन है। तीसरे दिन बिहार विधानसभा में सोलर लाइट का मुद्दा उठा। खराब लाइटों को लेकर एनडीए के विधायकों ने अपनी ही सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को चुनौती दी है।
बिहार के पंचायतों में स्थित तीर्थ स्थल से लेकर पशु बूचरखाना तक पर टैक्स लगेगा। हाट और मेला पर भी शुल्क लगेगा। ग्रामीणों और व्यावसायियों से टैक्स लेने के पीछे तर्क है कि इससे पंचायतों की आय बढ़ेगी।