
राजधानी दिल्ली में 14 से 16 जनवरी तक कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस होने जा रही है। इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश हिस्सा नहीं लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे।

अगर 2010 की तरह 2030 में भी आयोजन पर किसी तरह के दाग लगे तब तो आने वाले कई दशकों तक भारत को ओलिंपिक मेजबानी को भूल ही जाना होगा। लिहाजा अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स एक बड़ा मौका भी है और साथ में बड़ी चुनौती भी।

Commonwealth Games 2030: एक बार फिर से कॉमनवेल्थगेम भारत में होंगे। अहमदाबाद को 2030 के कॉमवेल्थ गेम की मेजबानी मिली है। आइए जानते हैं ऐसे कंपनियों के विषय में जिनको कॉमनवेल्थगेम से फायदा हो सकता है।

India 2030 Commonwealth Games: भारत में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन होगा। भारत की मेजबानी पर औपचारिक मुहर लग गई है। भारत 20 साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा।

राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी अधिकार हासिल करने को लेकर आश्वस्त भारत की बोली को बुधवार को ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेलों की आम सभा में औपचारिक रूप से मंजूरी मिल जाएगी। ये देश की वैश्विक बहु-खेल केंद्र बनने की महत्वाकांक्षी योजना में मील का पत्थर साबित होगा।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी टी उषा को पूरा यकीन है कि भारत को 26 नवंबर को ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेल आमसभा की बैठक के दौरान 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिल जाएगी। भारत लंबे समय बाद इन खेलों की मेजबानी करेगा।

बिहार की नीतीश सरकार में पहली बार मंत्री बनाई गईं भाजपा की जमुई से विधायक श्रेयसी सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिला चुकी हैं। उनके पिता भी केंद्र में मंत्री रहे थे।

राष्ट्रमंडल खेल की कार्यकारी बोर्ड ने 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए अहमदाबाद के नाम की सिफारिश की है। भारत ने आखिरी बार 2010 में दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की थी।

भारत की कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की दावेदारी को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। मेजबानी के लिए अहमदाबाद शहर पर मुहर लगी है। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के सहमति जताने के कुछ दिन बाद ही यह फैसला लिया गया है।

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने बुधवार को यहां अपनी विशेष आम बैठक (एसजीएम) के दौरान 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए देश की बोली को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी।