
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में बोलते हुए, CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को डिजिटल अरेस्ट, स्कैम और दूसरे साइबर क्राइम की नई चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को बदलना होगा।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अरुंधति रॉय एक प्रसिद्ध लेखिका हैं। उन्होंने ऐसी किसी चीज़ को बढ़ावा नहीं दिया है। पुस्तक में एक चेतावनी भी दी गई है, और वह स्वयं एक प्रख्यात व्यक्ति हैं।

चिट्ठी लिखने वालों में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह, मद्रास हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस के चंद्रू, पटना हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस अंजना प्रकाश, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी दिल्ली के पूर्व निदेशक प्रो. मोहन गोपाल भी शामिल हैं।

सीजेआई ने कहा कि मंदिर का पैसा भगवान का है और इसलिए, पैसे को सिर्फ मंदिर के हितों के लिए बचाया, सुरक्षित और इस्तेमाल किया जाना चाहिए और यह किसी कोऑपरेटिव बैंक के लिए इनकम या गुजारे का जरिया नहीं बन सकता।

तमिल पार्टी ने याचिका में कहा है कि 35 से 40 के करीब BLOs की मौत हो चुकी है और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के सेक्शन 32 के तहत BLOs को जेल भेजने की धमकी देकर उन्हें काम करने के लिए मजबूर कर रहा है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह जुर्म 2009 का है और ट्रायल अब तक पूरा नहीं हुआ। अगर नेशनल कैपिटल ऐसी चुनौतियों को हैंडल नहीं कर पाएगी तो कौन करेगा? यह तो शर्म की बात है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि शुरुआत में, जब मैंने इस पेशे को अपनाया, तो पूरी तरह से अनिश्चितता का माहौल था। परिवार में पहली पीढ़ी का वकील होने के नाते, मेरा मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था।

जस्टिस नागरत्ना ने यह टिप्पणी तब की, जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने अंग्रेजी में दक्षता न रखने वाले वकीलों के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में एक महिला वकील की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब दिया।

जब सीनियर एडवोकेट मल्होत्रा ने उनकी मदद करनी चाही तो महिला वकील गुस्से में और चिल्लाने लगीं। इसी बीच, बेंच ने कोर्ट मार्शल बुलवा लिया। यह देख महिला वकील और भड़क गईं।

यह टिप्पणी तब आई है जब कुछ समूह रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में शरणार्थी का दर्जा देने की मांग उठा रहे हैं। म्यांमार की सैन्य सरकार उन्हें ‘बांग्लादेशी घुसपैठिए’ मानती है और देश का नागरिक नहीं मानती।