
मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से निकला चीता केजीपी-3 राजस्थान के बंध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य पहुंच गया है।

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक भारतीय मूल की मादा चीता, जिसे केजीपी-11 कहा जाता है, उपचार के दौरान मर गई। यह चीता घायल अवस्था में मिली थी और उसे इलाज के लिए एक पशु चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई, जिससे कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 49 रह गई।

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता केवल संरक्षण नहीं है, बल्कि इंसानियत की ऐतिहासिक गलती को सुधारने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि हमें किसी भी प्रजाति को विलुप्त नहीं होने देना चाहिए और प्रकृति की रक्षा करते हुए जीवन का संतुलन बनाए रखना चाहिए।

श्योपुर जिले के कुनो नेशनल पार्क में चार महीने के चार चीता शावकों की मौत हो गई। अधिकारियों का मानना है कि तेंदुए ने इन शावकों को मारा होगा। शव संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पाए गए थे। चीता परियोजना के निदेशक ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पुष्टि होगी।
टाटानगर रेलवे यार्ड में मंगलवार रात चीता के घूमने से दहशत मच गई। आरपीएफ ने अलर्ट जारी कर दिया और चीता की खोज में जुट गई। रेलवे और वन विभाग की टीमें सक्रिय हैं। जंगली जानवरों के शहर में प्रवेश की घटनाएं बढ़ रही हैं।
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चार शावकों की मौत हो गई है। ये शावक एक महीने पहले जन्मे थे और मंगलवार सुबह उनके शव मां चीता के पास मिले। प्रारंभिक जांच में उनकी मौत किसी दूसरे जंगली जानवर के हमले से होने की आशंका है। अब भारत में कुल 53 चीते बचे हैं।
-मुख्यमंत्री बोले, मध्य प्रदेश ने चीता राज्य के रूप में पहचान बनाई श्योपुर,
मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से भटकर राजस्थान के रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान पहुंचे चाते को ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित तरीके से वापस भेज दिया गया। वन अधिकारियों ने बताया कि चीते की गतिविधियों की निगरानी के बाद विशेषज्ञों ने उसे ट्रैंक्विलाइज करने का निर्णय लिया। इस ऑपरेशन के दौरान विशेष सावधानी बरती गई।
राजस्थान में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच राज्य वन विभाग ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब किसी भी लेपर्ड को ‘आदमखोर’ घोषित कर उसे मारने की अनुमति देना आसान नहीं होगा। नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है
जंगल का असली बादशाह इस वक्त सड़कों पर नहीं, बल्कि पगडंडियों पर अपनी कहानी लिख रहा है। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकला ‘घुमक्कड़’ चीता KP-3 अब राजस्थान की सरहद पर दस्तक दे चुका है।