
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया है कि इस प्रक्रिया में जातिगत गणना को भी शामिल किया जाएगा। वहीं 2027 में होने वाली जनगणना पहली डिजिटल जनगणना होगी।

भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी जनगणना के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति 15 जनवरी 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। परिपत्र के अनुसार, इस डेटा संग्रह कवायद के लिए प्रगणक और पर्यवेक्षक मुख्य जनगणना अधिकारी होंगे।

स्थानीय निकाय निदेशक अनुज कुमार झा ने इस संबंध में निकायों के साथ जिलाधिकारियों को विस्तृत निर्देश भेजा है। जनगणना से पहले नगरीय निकायों के विस्तारित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। देखा जाएगा कि वर्ष 2011 के बाद कितना शहरी दायरा बढ़ा। वाह्य वृद्धि वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।

जनगणना 2027 टेक्नोलॉजी के लिहाज से ऐतिहासिक प्रयोग साबित होगी। हालांकि चुनौतियां अगर सफलतापूर्वक संभाली गईं, तो भारत दुनिया की सबसे तेज, सबसे बड़ी और सबसे आधुनिक डिजिटल जनगणना का नया मानक स्थापित कर सकता है।

देशभर में होने वाली जनगणना के लिए राजधानी दिल्ली में अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं। दिल्ली में जनगणना से पूर्व इसके लिए ट्रायल किया जाएगा। इसके लिए चिराग दिल्ली (निगम वार्ड संख्या 172) को चुना गया है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस 20-दिवसीय परीक्षण के दौरान एकत्र किया गया डेटा केवल प्रणाली मूल्यांकन के लिए होगा और इसे आधिकारिक जनगणना आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा।

कर्नाटक सरकार की ओर से जातीय जनगणना का यह कहते हुए विरोध हो रहा है कि इसका राजनीतिक इस्तेमाल करने की तैयारी है। इसके अलावा एक बार जातीय गणना होने के बाद दोबारा फिर इसकी क्या जरूरत है, यह सवाल भी उठाया जा रहा है। इसी को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट में मंगलवार को दिलचस्प बहस देखने को मिली।

बिहार में जनगणना की तैयारी शुरू हो गई है। जनगणना अगले साल से दो चरणों में शुरू होगी। 2026 में मकानों की गिनती की जाएगी, उसके बाद 2027 में लोगों की गणना होगी।

उत्तर प्रदेश में शहरी सीमा अब फिलहाल नहीं बढ़ेगी। बताया जा रहा है कि अब जनगणना होने के बाद ही शहरी सीमाओं का विस्तार करने और नए निकायों के बनाने पर सहमति बनी है।

डिजिटल जनगणना होने के कारण इसमें लोगों को स्व-गणना का भी विकल्प दिया गया है। इसके अलावा, जनगणना 2027 में एक और चीज पहली बार होगी। इसके तहत पहली बार सभी आवासीय और गैर-आवासीय भवनों की जियो-टैगिंग की जाएगी।