
सीबीआई ने 23 फरवरी 2009 को पूर्व डीआईजी विनोद शर्मा और अन्य पर एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया कि तत्कालीन DIG ने आपराधिक साजिश रची थी। इसका उद्देश्य CRPF में सिपाही (सामान्य ड्यूटी) के उम्मीदवारों से अवैध उगाही करना था। वह बिचौलियों को भर्ती कार्यक्रम, पदों की जानकारी पहले उपलब्ध करा देते थे।

सीबीआई के पॉक्सो एक्ट लगाने के बाद विशेष न्यायिक दंडाधिकारी ने मामले को पटना सिविल कोर्ट के पॉक्सो की विशेष अदालत में मुकदमा का अभिलेख भेज दिया। नीट छात्रा कांड मामले की सुनवाई पॉक्सो की विशेष अदालत में चल रही है।

झांसी जीएसटी घूसकांड में डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के साथ पकड़े गए अधीक्षकों अजय कुमार शर्मा और अनिल कुमार तिवारी पर सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का नया केस दर्ज किया है। जांच में करोड़ों की काली कमाई उजागर हुई है।

संजीव हंस द्वारा किए गये इन एहसानों के बदले में अनुभव अग्रवाल ने विपुल बंसल के माध्यम से संजीव हंस को एक करोड़ का भुगतान किया। सीबीआई को पता चला है कि रिश्वत की उक्त राशि संजीव हंस के सहयोगी शादाब खान और पुष्पराज बजाज के माध्यम से किश्तों में दी गई थी।
नीट छात्रा के मामा ने कहा कि जो डॉक्टर शुरू से परिवार वालों पर ही मारने का आरोप लगाता है, उसके सामने हम कैसे रह पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटना पुलिस की तरह सीबीआई भी इस केस में कुछ नहीं कर रही है। उन्हें सीबीआई जांच पर भरोसा नहीं है।
नीट छात्रा की मौत मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम को जहानाबाद में विरोध का सामना करना पड़ा। सीबीआई की टीम छात्रा के घर पर पूछताछ के लिए गई थी। मगर अधिकारी वहां से बैरंग लौट गए।
सीबीआई ने दिल्ली के सुल्तानपुरी थाने में छापेमारी कर एक हेड कॉन्स्टेबल को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार, इसके अलावा दो अन्य पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है।
रौशनी कुमारी और अनु कुमारी का बयान अलग-अलग होने पर अदालत ने मनीष रंजन से भी पूछताछ की। मनीष ने अदालत को बताया कि घटना के दिन वह घर पर था। 5 जनवरी की सुबह बेटी को लेकर पावापुरी मेडिकल कॉलेज गया था, उसी रात 8 बजे लौट आया था।
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली जहानाबाद की नीट छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में पटना पुलिस ने नौ जनवरी को दर्ज एफआईआर में पॉक्सो एक्ट नहीं लगाया था। अब इसे जोड़ दिया गया है।
सीबीआई ने अबतक की जांच के बाद भी पॉक्सो एक्ट नहीं लगाया और न ही मनीष रंजन को रिमांड पर लिया। उल्लेखनीय है कि कांड की गंभीरता को देखते हुए पटना आईजी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर पॉक्सो एक्ट के तहत जांच शुरू हुई थी।