
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वे राहुल और प्रियंका गांधी को तब से जानते हैं जब वे बच्चे थे, और उनके पिता व पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी उनके सहपाठी व दोस्त थे।

कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाजपा में भविष्य को लेकर सस्पेंस तब और गहरा गया जब वे उस आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए जहां केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब भाजपा अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था।

पिछले काफी समय से कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा में अनदेखी के चलते नाराज चल रहे हैं। हाल ही में केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया अध्यक्ष बनाए जाने से पहले उनसे इस बारे में सलाह नहीं लेने से भी कैप्टन ने नाराजगी जताई थी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई के पार्टी से इस्तीफा देने की अटकलें हैं। हालांकि, अभी खबरें हैं कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। कहा जा रहा है कि पूर्व IPS नए दल का गठन कर सकते हैं। फिलहाल, उन्होंने इन आधिकारिक रूप से अपना प्लान नहीं बताया है।
यह मामला 2011 में फ्रांस सरकार से भारत को प्राप्त विश्वसनीय सूचनाओं से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमरिंदर सिंह का परिवार विदेशी व्यापारिक संस्थाओं के माध्यम से रखरखाव और नियंत्रण की जाने वाली विदेशी संपत्तियों का लाभार्थी है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस शासन के दौरान दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 2022 में अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) का विलय करने के बाद बीजेपी में शामिल हुए थे।
नवजोत कौर सिद्धू के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने जो कहा वह पूरी तरह गलत है। वह (नवजोत सिंह सिद्धू और नवजोत कौर सिद्धू) अस्थिर हैं, मैंने उन्हें लंबे समय से देखा है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह से सवाल किया गया कि भाजपा चुनावी तौर पर पंजाब को नहीं समझ पाई है। इस पर कैप्टन ने जवाब दिया, '...भाजपा के शुरुआती नेताओं ने जो किया वो गलत हो गया। आपको हर चुनाव लड़ना चाहिए था। आप जंग से नहीं भाग सकते।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य की जनता से 2027 के चुनावों में भाजपा को वोट देने की अपील की। उन्होंने वर्तमान AAP सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
किताब में लिखा है कि सिंह को संदेह है कि दरबारा सिंह - जिन्होंने पहले भिंडरावाले की गिरफ्तारी का समर्थन किया था - अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जैल सिंह पर पलटवार करना चाहते थे। हालांकि, सिंह का कहना है कि अगर बातचीत को अवरुद्ध नहीं किया गया होता, तो कुछ सार्थक प्रगति हो सकती थी।