
ICC ने गवर्नेंस से जुड़े मामलों की वजह से क्रिकेट कनाडा को मिलने वाली फंडिंग रोक दी है। क्रिकेट कनाडा को आईसीसी ने हाल ही में बताया था और अगले छह महीनों तक उसे मिलने वाली फंडिंग पर रोक लग सकती है।

पीलीभीत में नौकरी के लिए कनाडा भेजने के नाम पर एक युवक से 11 लाख रुपए की ठगी की गई। आरोपी जगमोहन सिंह ने खुद को विदेश में नौकरी दिलाने वाला एजेंट बताकर पीड़ित परिवार से संपर्क किया और पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।

फीफा विश्व कप 2026 का उद्घाटन समारोह अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेज़बानी में होगा। उद्घाटन समारोह में नोरा फतेही और कैटी पैरी जैसे कलाकारों का जलवा देखने को मिलेगा। कनाडा में 12 जून को मैच से पहले ये समारोह आयोजित होगा, जिसमें अन्य मशहूर सितारे भी शामिल होंगे।

भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता का अगला दौर जुलाई में ओटावा में होगा। ओमान और चिली के साथ व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। भारत और ओमान के बीच एफटीए का शीघ्र क्रियान्वयन पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत ने कनाडा से संचालित भारत-विरोधी चरमपंथी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है। इस अपील का कारण कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस की रिपोर्ट है, जिसमें खालिस्तानी तत्वों के कारण कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताया गया है।
भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता का दूसरा दौर शुरू किया है। यह वार्ता वस्तुओं, सेवाओं और नीतिगत क्षेत्रों में व्यापार पर केंद्रित है। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।
रिपोर्ट में कहा गया, 'कुछ खालिस्तानी चरमपंथी कनाडाई नागरिकों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं, जो हिंसक चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देने लगे हैं। ये भोले-भाले समुदाय के सदस्यों से धन इकट्ठा करने के लिए कनाडाई संस्थानों का लाभ उठाते हैं।'
कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने अपनी 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' में भारत पर विदेशी दखलंदाजी और जासूसी के गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में साथ ही खालिस्तानी खतरे को भी स्वीकार किया गया है। पढ़ें पूरी खबर।
- कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा ने अपनी रिपोर्ट में किया दावा - चीन,
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 10 वर्षीय बच्ची को उसके पिता के पास कनाडा भेजने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि मां बच्चे की पहली शरणस्थली है और बच्चे का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। अदालत ने कनाडा के न्यायालय के आदेश को केवल एक प्रासंगिक कारक माना, लेकिन निर्णायक नहीं।