
प्रदेशभर में कुल 1570 कैंसर स्क्रीनिंग शिविर लगाए जा चुके हैं। इन शिविरों में 16479 महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर के लिए जांच की गई, जिनमें से 637 महिलाओं में कैंसर के लक्षण पाए गए। उन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए रेफर किया गया। वहीं सर्वाइकल कैंसर के लिए 24892 महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई।

लिनियर एक्सीलेरेटर की आपूर्ति इसी साल मार्च के अंत तक हो जाएगी। इसके बाद इसका इन्स्टालेशन होगा और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त होने के बाद इसे इसी साल के अंत तक पूर्ण रूप से कार्यशील कर दिया जाएगा।

इस पहल के जरिए DSCI स्कूली बच्चे और बच्चियों यानी नवयुवकों को कैंसर के प्रति जागरूक और उसकी रोकथाम के प्रति सजग कर रहा है। ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके और लोग बेहतर कल के साथ जी सकें।

महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई। यह 6.5% बढ़कर 2025 में 686 मामले हो गए, जो 2024 में 644 और 2023 में 604 थे। पुरुषों में ओरल कैंसर के मामलों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ब्रेस्ट कैंसर से उबरी महिलाओं में रिकंस्ट्रक्शन तकनीक आत्मविश्वास बढ़ा रही है। इससे दोबारा स्तन बनाए जा रहे हैं। मेदांता गुरुग्राम के डॉ. आदित्य अग्रवाल ने यह जानकारी वाराणसी में चार दिवसीय ‘एपिकॉन-2025’ में दी। यह भी कहा कि यह सर्जरी बेहद सफल भी है।

भारतीय महिलाओं को होने वाले कैंसर में 14% मामले ब्रेस्ट कैंसर के होते हैं। शुरुआत में अगर यह बीमारी पकड़ में आ जाए तो इससे पूरी तरह से उबरना संभव है। आइए जानें कैसे समय रहते इस कैंसर से अपना बचाव किया जा सकता है। बता रही हैं दिव्यानी त्रिपाठी

भारत में कैंसर के मरीजों और कैंसर से होने वाली मौतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वहीं चीन और अमेरिका में कैंसर के मामलों में कमी देखी गई है। कैंसर के पीछे सबसे बड़ा कारण तंबाकू उत्पादों का सेवन बताया गया है।

रिसर्च स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि स्तन कैंसर दक्षिण भारतीय शहरों में तेजी से और व्यापक पैमाने पर पसरा है, जबकि देश के अन्य क्षेत्रों में दूसरे किस्म के कैंसर के मामले बढ़े हैं। पूर्वोत्तर में लंग्स कैंसर तो अहमदाबाद में ओरल कैंसर फैल रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए अलग से किसी कैंसर अस्पताल के निर्माण का प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने यह जरूर कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्क्रीनिंग की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा ताकि पता चल सके कि महिलाओं में कैंसर की क्या स्थिति है।

शोध के मुताबिक, मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगों के संपर्क में आने पर किसी भी प्रकार का कैंसर नहीं होता है। शोध में मोबाइल, ल्यूकेमिया और मुंह के कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।