
ऑपरेशन से जन्मे 90 प्रतिशत बच्चों को तुरंत मां का दूध नहीं मिलता है। बाल रोग अकादमी के सर्वे में यह बात सामने आई है। कई बच्चों को पहला दूध जन्म के दो-तीन दिन बाद मिल रहा है, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद भी स्तनपान कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।

सम्राट कैबिनेट ने बिहार के शहरी क्षेत्रों में जमीन सर्वे को मंजूरी दे दी है। इसके लिए नई नियमावली भी लाई गई है। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि का नया खतियान और नक्शा भी तैयार किया जा रहा है।

सम्राट चौधरी ने भूमि सर्वेक्षण का काम अभियान चलाकर पूरा करने को कहा है। खासकर सर्वे का काम तेजी से पूरा होने पर जमीन विवाद में कमी आएगी। इससे अपराध की घटनाएं भी कम होगी। सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि लंबित विभागीय कार्यों को अभियान चलाकर पूरा किया जाए।

बिहार में जमीन और मकानों के निबंधन में गड़बड़ी सुधारने की प्रक्रिया और आसान कर दी गई है। इसके लिए राज्य सरकार ने डेडलाइन तय कर अफसरों की जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दी है। इस संबंध में निबंधन विभाग की ओर से नई एसओपी जारी की गई है।
Bihar Land Survey: अभी तक ऐसी भूमि की राज्य में पहचान उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक जिले की असर्वेक्षित भूमि और बकास्त भूमि की समीक्षा करने के निर्देश दिये गये हैं। इस विषय पर 10 अप्रैल को विभागीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई है।
भूमि सर्वेक्षण पूरा होने से राज्य में भूमि अभिलेख पूरी तरह अपडेट और पारदर्शी हो जाएंगे, जिससे आम लोगों को जमीन से जुड़े विवादों से काफी राहत मिलेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण के कार्य को गति प्रदान करने के उद्देश्य से 13 मार्च को समीक्षा बैठक बुलाई गई है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वे कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी प्रकार की गलती की शिकायत पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई होगी। जहां भी त्रुटि या अनावश्यक विलंब पाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
बिहार में फरवरी महीने में रविवार को भी निबंधन कार्यालय खुले रहेंगे। महाशिवरात्रि को छोड़कर सभी दिन जमीन की खरीद-बिक्री का रजिस्ट्री कार्य होगा। इससे लोगों को सुविधा, भीड़ कम और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
बिहार में जमीन विवाद के मामलों में पुलिस की भूमिका अब कानून-व्यवस्था तक ही सीमित रहेगी। पुलिसकर्मी कोर्ट या सक्षम प्राधिकार के आदेश के बिना किसी जमीन का दखल-कब्जा नहीं दिला सकेंगे। 1 फरवरी से पूरे राज्य में ये नियम लागू हो जाएंगे।
नीतीश सरकार ने जमीन के कामों में लापरवाही बरतने वाले अंचलाधिकारियों (सीओ) के खिलाफ सख्ती अपनाई है। उन्हें नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। सही जवाब नहीं मिलने पर उनका वेतन और प्रमोशन रोका जा सकता है।