
देश की सबसे बड़ी अदालत में अब भोजशाला विवाद की रोजाना सुनवाई होगी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने मुसलमानों के लिए नमाज स्थल की व्यवस्था करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज भोजशाला मामले की रोजाना सुनवाई पर सहमति जताई है। सीजेआई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि हमें ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करना चाहिए जिससे तनाव पैदा हो। इसके साथ ही दोनों पक्षों को भी धैर्य रखना होगा।

भोजशाला मामले में एक हिंदू संगठन ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र एएसआई की कार्यप्रणाली पर असंतोष जाहिर किया है। संगठन का आरोप है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी एएसआई द्वारा आदेशों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा।

भोजशाला परिसर में वाग्देवी सरस्वती की मूर्ति अचानक पाए जाने के बाद जहां एक तरफ भक्तों में खुशी दिखी तो एएसआई की बेचैनी सुरक्षा को लेकर बढ़ गई। सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस और एएसआई के अधिकारियों को कुछ पता कैसे नहीं चला।
इस फैसले के केंद्र में जो मूर्ति है, वह भारत में है ही नहीं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है- आखिर यह मूर्ति कहां है? भारत कैसे वापस आएगी? ठीक है, मान लीजिए इन सवालों के जवाब मिल जाते हैं, लेकिन एक दिलचस्प बहस अभी भी बनी हुई है- आखिर ये मूर्ति किस देवी की है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानने के फैसले से आंदोलनकारियों में भारी खुशी है। 11वीं सदी से जुड़े इस विवाद में 95 वर्षीय विमल गोधा समेत कई योद्धाओं ने लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां झेलीं। इस रिपोर्ट में विमल गोधा की कहानी…
Bhojshala and Famous Tourist Places: भोजशाला पर आए ऐतिहासिक हाईकोर्ट के फैसले के बाद लोगों में इस जगह की दिलचस्पी बढ़ गई है। जबकि एमपी के छोटे से शहर धार में भोजशाला के साथ और भी कई ऐतिहासिक महल हैं, जो टूरिस्ट देखने जाते हैं।
Bhojshala Temple Worship : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शुक्रवार को भोजशाला से जुड़े अपने फैसले में एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी तथा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।
हाईकोर्ट ने विवादित परिसर में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार स्वीकार की और इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार स्मारक में नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी।
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे दुरुस्त करेगा और इस आदेश को पलट देगा। बाबरी मस्जिद के फैसले से इसमें स्पष्ट समानताएं हैं।'