
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा में चोरी के मामले में अब पूर्व सांसद और बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने कुछ नहीं बोलते हुए भी बहुत कुछ बोल दिया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सच बोलूंगा तो परेशानी में आ जाऊंगा। वह बहुत बड़े लोग हैं।

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों के बीच यहां पर लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह ने सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे वहां खेल हो रहा था। इसकी शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी की गई। इसके बाद उन्हें ही यहां से हटा दिया गया था।

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद एक तरफ सियासत तेज हो गई तो दूसरी तरफ गोपनीय जांच में डेढ़ करोड़ बरामद हुए हैं। मंदिर के नौ कर्मचारियों से पूछताछ जारी है। रडार पर आए कई कर्मचारियों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस मामले में कथित हेराफेरी और पारदर्शिता को लेकर 11 सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इस घोटाले का सरगना कौन है, उसे कौन बचा रहा है।
राम मंदिर से चढ़ावा गायब होने के आरोप और विवाद बढ़ने के साथ सियासत गरमा गई है। इस पर रिपोर्ट भी तलब कर ली गई है। इस बीच अचानक भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंच गए हैं। उन्होंने पहुंचते ही ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ बैठक की।
राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सपा चीफ की पोस्ट पर उप मुख्यंत्री ब्रजेश पाठक का बयान आया है। ब्रजेश पाठक अखिलेश यादव पर खूब बरसे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश की सोच बाबरवादी है।
अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावे की रकम को लेकर ट्रस्ट के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 40 सेकंड की सफाई देने में घंटों लगना संदेह पैदा करता है। वहीं ट्रस्ट का दावा है कि ऑडिट जारी है और कोई अनियमितता सामने नहीं आई है।
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की रकम गायब होने के अखिलेश यादव के आरोप पर सियासत तेज हो गई है। पंकज चौधरी ने इसे मंदिर विषय बताते हुए कहा कि हर बयान का जवाब देना जरूरी नहीं है।
अखिलेश यादव ने एक पोस्ट में कहा कि राम के उपासकों के लिए ये संवेदनशील खबर है कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। अदालत इसे से स्वतः संज्ञान ले।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों में से एक सोशल मीडिया पर समूह बनाकर जिहाद, खिलाफत और गजवा-ए-हिंद से जुड़ी चर्चाएं करता था। इसी मंच पर संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाएं भी साझा की जा रही थीं।