
14 मई 2026 को शुक्र ग्रह अपनी राशि वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष में शुक्र को प्यार, पैसा, सुंदरता, सुख-सुविधा और लग्जरी का कारक माना जाता है। मिथुन राशि में शुक्र का यह गोचर कई राशियों की लाइफ में बदलाव ला सकता है।

एक बार कृष्ण अर्जुन के सामने कर्ण की दानवीरता की प्रशंसा करने लगे। यह सुन अर्जुन ने कहा, ‘हे केशव, महाराज युधिष्ठिर भी तो परम दानी हैं।’ कृष्ण ने कहा,‘निसंदेह युधिष्ठिर भी दानी हैं, लेकिन दानवीरता में कर्ण का मुकाबला कोई नहीं कर सकता

मई का महीना ज्योतिष के हिसाब से खास रहने वाला है। इस दौरान एक खास योग बन रहा है। 11 मई 2026 को सूर्य, बुध और मंगल एक साथ मेष राशि में आ जाएंगे। जब तीन बड़े ग्रह एक ही राशि में आते हैं, तो इसे त्रिग्रही राजयोग कहा जाता है। माना जाता है कि ऐसा संयोग अचानक बदलाव और मौके लेकर आता है।

ज्योतिष में बुध को राजकुमार ग्रह बोला जाता है। ये दिमाग और बोलचाल से जुड़ा ग्रह है। इंसान कैसे सोचता है, कैसे समझता है, कैसे अपनी बात रखता है- ये सब बुध से ही देखा जाता है। जिसकी कुंडली में बुध ठीक होता है, वो बंदा जल्दी चीज़ पकड़ लेता है, बात साफ करता है और बेकार की उलझन में नहीं पड़ता।
घर में बार-बार चीजें टूटना-फूटना ग्रह दोष या नकारात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है। शनि और राहु के अशुभ प्रभाव से होने वाली इस समस्या के कारण और बचाव के प्रभावी वास्तु उपाय जानिए। घर की सकारात्मक ऊर्जा कैसे बहाल करें, इस लेख में विस्तार से पढ़ें।
हिंदू धर्म में सीता नवमी का विशेष महत्व होता है। इसको जानकी नवमी भी कहा जाता है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर माता सीता का प्राकट्य हुआ था। हर साल इसी दिन माता सीता का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। इस साल सीता नवमी 25 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
माता के गर्भ से जो जन्म होता है, उस पर जन्म-जन्मांतरों के संस्कार हावी रहते हैं। यज्ञोपवीत संस्कार द्वारा बुरे संस्कारों का शमन करके अच्छे संस्कारों को स्थाई बनाया जाता है। इसी को द्विज अर्थात दूसरा जन्म कहते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि देवी मां शीतला को समर्पित मानी जाती है। इन दोनों तिथियों पर मां शीतला की पूजा विशेष रूप से की जाती है। कई स्थानों पर सप्तमी के दिन व्रत और पूजा की जाती है, जबकि अष्टमी के दिन बसोड़ा मनाने की परंपरा है।
Shani sadesati mesh Rashi: मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती की शुरुआत हो चुकी है, अब शनि भी इसी राशि में रहेंगे। ऐसे में मेष राशि पर डबल अटैक रहेगा,अब साल 2032 तक इस राशि में शनि की साढ़ेसाती रहेगी।
चांदी को चंद्रमा और शुक्र ग्रह का प्रतीक माना जाता है। यह धातु शीतलता, भावनात्मक संतुलन, सौंदर्य और समृद्धि प्रदान करती है। लेकिन सभी राशियों के लिए चांदी समान रूप से शुभ नहीं होती है।