Hath ke anguthe me chandi ka challa pehne ke fayde: आपने लोगों को हाथ के अंगूठे में चांदी का छल्ला पहने हुए देखा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चांदी का छल्ला धारण करने से जीवन में कई अहम लाभ होते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

Haldwani News: रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही हल्द्वानी में महंगे सोने और चांदी की राखियों की मांग बढ़ गई है। बहनें अब अपने भाई की राशि के अनुसार विशिष्ट डिजाइन वाली राखियां तैयार करा रही हैं। महंगी राखियों की कीमतें 850 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक हैं, जिससे प्रीमियम राखियों में खास आकर्षण देखने को मिल रहा है।

मधुबनी में तीसरी सोमवारी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ शिवालयों में जलाभिषेक के लिए उमड़ी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन विशेष योग बने हैं, जिससे भक्तों में विश्वास और उत्साह है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच भक्तों ने दिनभर शिवलिंग का जलाभिषेक किया।

ग्रहों की स्थिति के अनुसार अगस्त से अक्टूबर 2026 तक का समय मिथुन, कन्या और तुला राशि वालों के लिए खास रह सकता है। गुरु 31 अक्टूबर तक कर्क राशि में रहेंगे, जिसे वैदिक ज्योतिष में उनकी उच्च राशि माना जाता है। वहीं शनि 11 दिसंबर तक मीन राशि में वक्री रहेंगे।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सितंबर 2026 तक गुरु और शनि की स्थिति कुछ राशियों के लिए राहत देने वाली रह सकती है। गुरु इस समय कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं और 31 अक्टूबर तक यहीं रहेंगे, जबकि शनि 27 जुलाई से मीन राशि में वक्री हैं और 11 दिसंबर तक वक्री अवस्था में रहेंगे।
2026 के आखिरी महीनों में गुरु, राहु और केतु की चाल में होने वाले बदलाव ज्योतिषीय नजरिए से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। गुरु 31 अक्टूबर को कर्क से सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि दिसंबर में राहु-केतु के राशि परिवर्तन की स्थिति बनेगी।
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की परंपरा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं मिलती हैं। महाभारत के आदिपर्व में नागों की उत्पत्ति की कथा महर्षि कश्यप की पत्नियों कद्रू और विनता से जुड़ी है। कद्रू ने एक हजार नाग पुत्रों का वरदान मांगा, जबकि विनता ने दो शक्तिशाली पुत्रों की इच्छा जताई।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त को है और इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है।
17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार, नाग पंचमी और सूर्य गोचर एक ही दिन हो रहे हैं। सूर्य कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य के इस राशि परिवर्तन का असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है।
17 अगस्त को नाग पंचमी और सावन सोमवार एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा के साथ कालसर्प योग और राहु-केतु से जुड़ी शांति के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं। चांदी के नाग-नागिन की पूजा, शिवलिंग पर जलाभिषेक और मंत्र जाप को कुछ परंपराओं में उपयोगी माना गया है।