
उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा एक ही दिन 31 मई को होने पर अभ्यर्थियों ने लोक सेवा आयोग को ज्ञापन देकर पुनर्विचार की मांग की। खेल प्रमाणपत्र में त्रुटि के कारण छात्रों को मुख्य परीक्षा से वंचित करने का मुद्दा भी उठाया गया। आयोग से समाधान का अनुरोध किया गया।

UPESSC Assistant Professor Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने सहायता प्राप्त गैर-सरकारी डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर (B.Ed.) के रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 107 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के असिस्टेंट प्रोफेसर उम्मीदवारों के लिए सभी विषयों की पुनर्परीक्षा आयोजित करने के फैसले में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

बिहार के विश्वविद्यालयों में प्राध्यापकों के लिए प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे कक्षाओं में पढ़ाना अनिवार्य होगा। लोकभवन ने सर्वोच्च अदालत के आदेशों ओर यूजीसी के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि इसे विश्वविद्यालयों में पूरी तरह लागू किया जाए।
बीआरएबीयू में 70 सहायक प्रोफेसरों के अनुभव प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी पाई गई, जिसकी जांच रिपोर्ट आयोग को भेजी जा रही है। कई शिक्षकों की पोस्टिंग और वेतन रोके गए हैं, जबकि कुछ मामलों में बर्खास्तगी भी हो चुकी है।
बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए अब पीएचडी डिग्री को रजिस्ट्रार से सत्यापित कराना होगा। रजिस्ट्रार के नहीं होने पर संकाय अध्यक्ष द्वारा सत्यापन किया जाएगा। पीएचडी करने वाले छात्रों को यह बताना होगा कि डिग्री रेगुलर मोड में ली गई है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी ने असिस्टेंट प्रोफेसर के 88 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। ये नियुक्तियां फार्मेसी, अंग्रेजी, कृषि विज्ञान, गृह विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, पर्यावरण विज्ञान समेत विभिन्न विभागों में की जाएंगी।
बीआरए बिहार विवि समेत बिहार के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को अब पूरे वर्ष के काम के आकलन के आधार पर प्रमोशन मिलेगा। लोकभवन ने इसके लिए एक स्टैच्यूट कमेटी बनाई है।
महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के लगभग 650 पद भरे जाएंगे। उम्मीदवारों को अपनी टीचिंग स्किल्स का टैलेंट दिखाने के लिए चयन समिति के सामने एक मॉक लेक्चर देना होगा।
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से चयनित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। जांच में सामने आया है कि कई अभ्यर्थियों ने आवेदन के समय पीएचडी पूरी नहीं की थी, फिर भी उन्हें अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर लाभ मिला।