
West Bengal Assembly Party Independent Representation: ममता बनर्जी की टीएमसी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल विधानसभा का दायरा सिकुड़ता जा रहा था। 2021 में सिर्फ 4 दलों के विधायक जीते थे। अब सदन में 6 पार्टियां दिखेंगी।

विधानसभा चुनाव बाद जारी कई एग्जिट पोल में पश्चिम बंगाल, असम और केरल को लेकर किए गए ज्यादातर पूर्वानुमान असल नतीजों के करीब रहे। एक प्रमुख सर्वेक्षण एजेंसी की ओर से तमिलनाडु में टीवीके को लेकर किया गया आकलन तो पूरी तरह सटीक साबित हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल और असम चुनाव परिणामों को लोकतंत्र और विकास की जीत बताया। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि जनता ने विकास की राजनीति पर भरोसा जताया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया और भाजपा अध्यक्ष के कुशल नेतृत्व की भी सराहना की।

भाजपा को केरल विधानसभा चुनाव में कुछ उम्मीद दिख रही है और अब तक उसके दो कैंडिडेट जीत चुके हैं। इन कैंडिडेट्स में से एक वी. मुरलीधरण भी हैं, जो कजाकुट्टम सीट से सीपीएम के कैंडिडेट के. सुरेंद्रन से जीत गए। उन्होंने 18 राउंड तक चली काउंटिंग में 428 वोटों से जीत हासिल की है।
हालिया विधानसभा चुनावों में NOTA को मतदाताओं का खास समर्थन नहीं मिला। असम में 1.29 फीसदी के अलावा अन्य राज्यों में इसका आंकड़ा 1 प्रतिशत से भी कम रहा। क्या कहते हैं आकड़े?
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत से वहां के राज्य कर्मचारियों को पीएम नरेंद्र मोदी का वादा याद हो रहा होगा। पीएम मोदी ने 7वें वेतन आयोग को लागू करने वादा चुनावी जनसभा में किया था। वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों को अधिक सैलरी मिलने लगेगी।
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईवीएम को कोई भी कहीं भी हैक कर सकता है।
पश्चिम बंगाल चुनाव मतगणना के रुझानों में BJP आगे है। वहीं तृणमूल कांग्रेस पीछे चल रही है। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोलकाता पुलिस ने जीत के जुलूसों और रैलियों पर रोक लगा दी है।
केरल विधानसभा चुनावों नतीजे घोषित किए जा रहे हैं। इस दौरान पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला एलडीएफ गठबंधन बुरी तरह हार रहा है। लेफ्ट की हार के साथ ही पिछले 50 सालों के इतिहास में पहली बार होगा, जब भारत में लेफ्ट का एक भी मुख्यमंत्री नहीं होगा।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने कमाल कर दिया है। पहली बार यहां कमल खिला है। भाजपा की जीत और टीएमसी की हार के कई कारणों में सायोनी घोष का वह गाना भी शामिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से ध्रुवीकरण को और हवा मिली।