
Ahoi ashtami muhurat 2025: अहोई अष्टमी का व्रत कुछ जगहों पर तारों को देखने के बाद और कुछ जगहों पर महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करने के बाद खोलती हैं। अहोई अष्टमी व्रत में अहोई माता की विधि-विधान से पूजा-्अर्चना की जाती है। जानें आज तारों व चंद्रमा के दिखने का समय

Tara uday time Today: आज अहोई अष्टमी है। आज के दिन बहुत ही फलदायी नक्षत्र पुष्य नक्षत्र लग रहा है और अमृत सिद्धि योग भी है जो अति शुभकारक है। यह व्रत माताएं पुत्रों की सलामती के लिए रखती हैं।

संतान प्राप्ति की कामना को लेकर देश-विदेश के लाखों दंपतियों का यहां राधा कुंड में होने वाले महास्नान की तैयारियां पूर्ण कर ली गयी हैं। अहोई अष्टमी पर जल रूप में विराजमान श्रीराधा रानी के कुंड में गोता लगाने के लिए लाखों की भीड़ आज उमड़ेगी।

Ahoi Ashtami 2025 Time Pooja Muhurat: आज अहोई माता की पूजा कर तारों व चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत का पारण होगा। शाम में पूजा के लिए कुछ ही देर का मुहूर्त रहेगा। इसके साथ ही सुबह में ही राहुकाल भी लग रहा है।

आज अहोई अष्टमी है। यह पुष्य नक्षत्र और अमृत सिद्धि योग में मनाई जाएगी जो अति शुभकारक है। यह व्रत माताएं पुत्रों की सलामती के लिए रखती हैं। अहोई अष्टमी उसी दिन मनाई जाती है आठ दिन बाद जिस दिन दीवाली होती है। इस दिन माताएं अपनी संतान के लिए इस व्रत को करती है।

अहोई अष्टमी का व्रत अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष मास की अष्टमी तिथि आद्रा, पुनर्वसु नक्षत्र परिधि योग बव करण के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। आज अहोई अष्टमी पर बनने वाले चार योग इसे और विशेष बना रहे हैं। इन योगों में पूजा अर्चना करना विशेष फलदायी होगा।

दीपावली से पहले आने वाली अहोई अष्टमी का व्रत विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस साल यह व्रत 13 अक्टूबर को है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किए जाने वाले इस व्रत को विशेष रूप से पुत्रवती महिलाओं और संतान सुख की कामना करने वाले दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उनकी रक्षा और तरक्की के लिए अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्तूबर को रखेंगी।

Ahoi Ashtami 2025 Pooja: अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक कृष्णपक्ष मास की अष्टमी तिथि पर रखा जाता है। इस व्रत को अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह पर्व आद्रा व पुनर्वसु नक्षत्र के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।

Ahoi ashtami kab hai: कार्तिक मास की अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 13 अक्टूबर को रहेगा। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए निर्जला व्रत करती है। आद्रा, पुनर्वसु नक्षत्र परिधि योग बव करण के शुभ संयोग में मनाया जाएगा।