DA Image
हिंदी न्यूज़ › खेल › Tokyo Olympics 2020: मेंस हॉकी में सुनहरा सपना टूटा, लेकिन पदक की उम्मीद कायम, एथलेटिक्स में खराब प्रदर्शन
खेल

Tokyo Olympics 2020: मेंस हॉकी में सुनहरा सपना टूटा, लेकिन पदक की उम्मीद कायम, एथलेटिक्स में खराब प्रदर्शन

एजेंसी,टोक्योPublished By: Mohan Kumar
Tue, 03 Aug 2021 06:38 PM
Tokyo Olympics 2020: मेंस हॉकी में सुनहरा सपना टूटा, लेकिन पदक की उम्मीद कायम, एथलेटिक्स में खराब प्रदर्शन

चार दशक बाद ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का भारतीय मेंस हॉकी टीम का सपना दुनिया की नंबर एक टीम बेल्जियम ने तोड़ दिया, हालांकि जर्मनी को हराकर ब्रॉन्ज का तमगा अभी भी मिल सकता है। वहीं एथलेटिक्स में भारतीयों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा जब गोलाफेंक में तेजिंदर सिंह तूर और भालाफेंक में अन्नु रानी क्वालीफाइंग दौर से बाहर हो गए। आखिरी क्वार्टर में खराब प्रदर्शन का खामियाजा भारतीय हॉकी टीम को भुगतना पड़ा और बेल्जियम ने उसे 5-2 से हरा दिया। मनप्रीत सिंह की टीम हालांकि टोक्यो खेलों में अब भी ब्रॉन्ज मेडल की दौड़ में बनी हुई है, जिसके लिए उसका सामना गुरुवार को जर्मनी से होगा। जर्मनी को दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1-3 से हार का सामना करना पड़ा।

भारतीय टीम एक समय बढ़त पर थी, लेकिन अंतिम 11 मिनट में तीन गोल गंवाने और अलेक्सांद्र हैंड्रिक्स (19वें, 49वें और 53वें मिनट) की हैट्रिक उस पर भारी पड़ गई। वर्ल्ड चैंपियन बेल्जियम की तरफ से हैंड्रिक्स के अलावा लोइक फैनी लयपर्ट (दूसरे) और जॉन जॉन डोहमेन (60वें मिनट) ने भी गोल किए। भारत की तरफ से हरमनप्रीत सिंह ने सातवें और मनदीप सिंह ने आठवें मिनट में गोल किए थे। बेल्जियम रियो ओलंपिक का रजत पदक विजेता है और उसने इस तरह से लगातार दूसरी बार ओलंपिक फाइनल में जगह बनाई है। कुश्ती में युवा भारतीय पहलवान सोनम मलिक को ओलंपिक में डेब्यू करते हुए महिला 62 किग्रा वर्ग के पहले दौर के मुकाबले में ही मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।

Tokyo Olympics 2020: मेडल राउंड में नहीं पहुंच सके तेजिंदरपाल सिंह तूर, 13वें स्थान पर रहे

उन्नीस साल की सोनम दो 'पुश-आउट' प्वॉइंट्स जुटाकर 2-0 से आगे चल रही थीं, लेकिन एशियाई चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता खुरेलखू ने भारतीय पहलवान को गिराकर दो प्वॉइंट्स हासिल करते हुए बराबरी हासिल कर ली, जबकि मुकाबले में सिर्फ 35 सेकेंड का खेल बचा था। इसके बाद अंत तक स्कोर 2-2 रहा लेकिन मंगोलिया की पहलवान को अंतिम प्वॉइंट जुटाने के कारण विजेता घोषित किया गया। मंगोलिया की पहलवान को अगले दौर में दूसरी वरीय और 2018 की विश्व चैंपियन बुल्गारिया की तैयब मुस्तफा युसेन से हार झेलनी पड़ी, जिससे भारतीय पहलवान भी स्पर्धा से बाहर हो गई।

एथलेटिक्स में एशियाई रिकॉर्डधारी शॉटपुट (गोला फेंक) खिलाड़ी तेजिंदर पाल सिंह तूर क्वालीफिकेशन में ग्रुप ए में 13वें स्थान पर रहकर फाइनल में जगह बनाने से चूक गए। तूर ने जून में इंडियन ग्रां प्री में 21.49 मीटर के सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। वे ओलंपिक में पहले प्रयास में ही वैध थ्रो फेंक सके जो 19.99 मीटर का था। वे 16 प्रतियोगियों में 13वें स्थान पर रहे । कंधे पर पट्टी बांधकर खेलने वाले तूर के दो प्रयास अवैध रहे। तूर दूसरे क्वालीफिकेशन (ग्रुप बी) से पहले ही बाहर हो गए। दोनों क्वालीफाइंग दौर में 21.20 मीटर पार करने वाले या कम से कम 12 प्रतियोगी फाइनल में पहुंचेंगे।

इतिहास रचकर भारत लौटीं पीवी सिंधु, दिल्ली एयरपोर्ट पर ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ जोरदार स्वागत- देखें VIDEO

वहीं अन्नु रानी भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाईं और 54.04 मीटर के निराशाजनक प्रदर्शन के साथ 14वें स्थान पर रहीं। अन्नु ने 14 खिलाड़ियों के ग्रुप ए में 50.35 मीटर भाला फेंककर शुरुआत की और अपने दूसरे प्रयास में 53.19 मीटर की दूरी तय की। इस 29 वर्षीय एथलीट को 12 खिलाड़ियों के फाइनल में जगह बनाने के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करने की जरूरत थी, लेकिन वह 63 मीटर के स्वत: क्वालीफिकेशन संख्या के करीब भी नहीं पहुंच पाईं। भारत के लिए कल का दिन महत्वपूर्ण है जब भारतीय महिला हॉकी टीम और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन पहली बार फाइनल में प्रवेश की कोशिश करेंगे। इसके साथ ही पदक उम्मीद नीरज चोपड़ा भालाफेंक में चुनौती पेश करेंगे।

लवलीना 69 किलोवर्ग के सेमीफाइनल में तुर्की की मौजूदा विश्व चैंपियन बुसेनाज सुरमेनेली के खिलाफ जीत दर्ज करके ओलंपिक फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बनने की कोशिश करेंगी। असम की 23 वर्षीय लवलीना इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हैं। वह पदक पक्का करके पहले ही विजेंदर सिंह (2008) और एम सी मैरीकॉम (2012) की बराबरी कर चुकी हैं। लवलीना का पदक पिछले नौ वर्षों में भारत का मुक्केबाजी में पहला पदक होगा, लेकिन उनका लक्ष्य अब फाइनल में पहुंचना होगा जहां अभी तक कोई भारतीय नहीं पहुंचा है।

संबंधित खबरें