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ओलंपिक में कुछ ऐसी रही है भारत की हिस्ट्री, कहां है सुधार की जरूरत, इस बार कितने मेडल की उम्मीद? पढ़ें रिपोर्ट

नूतन, लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Nootan Vaindel
Thu, 22 Jul 2021 11:06 AM
ओलंपिक में कुछ ऐसी रही है भारत की हिस्ट्री, कहां है सुधार की जरूरत, इस बार कितने मेडल की उम्मीद? पढ़ें रिपोर्ट

टोक्यो ओलंपिक काउंटडाउन की शुरुआत हो चुकी है। खेलों की इस महाप्रतियोगिता में अपना जलवा दिखाने के लिए भारत के सभी खिलाड़ी तैयार हैं। एक साल देरी से हो रहे इस ओलंपिक में भारत के 126 खिलाड़ी हिस्सा लेने के लिए टोक्यो जा रहे हैं। ये खिलाड़ी 18 खेलों की 69 प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे। बता दें कि भारत पहली बार इतनी बड़ी संख्या में अलग-अलग खेलों में भाग लेगा। भारत को इस साल अपने खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदे हैं। वहीं ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन की बात करें को तो अब तक हमने कुल 28 मेडल जीते हैं।

116 सालों के ओलंपिक इतिहास में जीते 9 गोल्ड मेडल

साल 1900 से 2016 तक भारत ने ओलंपिक में अब तक कुल 28 पदक अपने नाम किए हैं। इनमें नौ गोल्‍ड, सात सिल्‍वर और 12 कांस्‍य यानी ब्रॉन्‍ज मेडल शामिल हैं। भारत ने अब तक के ओलंपिक इतिहास में सबसे ज्‍यादा मेडल हॉकी में लिए हैं। हमने हॉकी में 11 मेडल जीते हैं- आठ गोल्‍ड, एक सिल्‍वर और दो ब्रॉन्‍ज मेडल। जबकि निशानेबाजी में भारत ने चार पदक जीते हैं। इसके अलावा भारत ने कुश्ती में पांच, बैडमिंटन और मुक्केबाजी में दो-दो तथा टेनिस और वेटलिफ़्टिंग में एक-एक पदक अपने नाम किया है। 

पिछले रियो ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था और उसे केवल एक सिल्वर मेडल और एक कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था। भारत के लिए बैडमिंटन में पीवी सिंधु ने सिल्वर मेडल और कुश्ती में साक्षी मलिक ने कांस्य पदक जीता था। इस साल भारत बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी और निशानेबाजी में पदक का प्रबल दावेदार है। 

 भारत के मुकाबले अब तक 20 गुना पदक जीत चुका है चीन

वहीं अगर भारत के पड़ोसी देश चीन की बात करें, जिसकी जनसंख्या लगभग भारत के बराबर है तो उसका प्रदर्शन ओलंपिक में काफी बढ़िया रहा है। चीन अब तक ओलंपिक में 546 मेडल जीत चुका है।  224 गोल्ड, 166 सिल्वर और 156 ब्रोंज। वहीं भारत ने अब तक कुल 28 पदक ही जीते हैं।  जिनमें 9 गोल्ड हैं। इसके अलावा 40 लाख आबादी वाला देश क्रोशिया भी मेडल के मामले में भारत से आगे है।  क्रोशिया ने अब तक 33 मेडल अपने नाम किए हैं।  इन सब से यह तो साफ है कि खेल के क्षेत्र में हम थोड़ा पीछे हैं।  

भारत का प्रदर्शन खराब क्यों?

वरिष्ठ पत्रकार आदेश गुप्त इसके पीछे कई कारण बताते हैं। वह कहते हैं, "जिस उम्र में भारत के खिलाड़ी ओलंपिक में जाना शुरू करते हैं।  उस उम्र में तो विदेशी खिलाड़ी मेडल लाने लगते हैं।  विदेशों में स्कूलों, कॉलेजों से ही खेलों में रूचि बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया जाता है और उनकी तैयारी शुरू कराई जाती है। लेकिन भारत में ऐसा नहीं है।  यहां स्कूल-कॉलेजों में खेलों को लेकर उतनी सुविधाएँ नहीं है।" 

आदेश बताते हैं कि भारत में खेलों में खराब प्रदर्शन का एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां खेल को एक करियर चॉइस के रूप में नहीं देखा जाता।  मां-बाप अपने बच्चों को खेलों में डालने में संकोच करते हैं। जो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके होते हैं उन्हें ही कुछ सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा जो खिलाड़ी ज्यादा शिक्षित नहीं होते वे इससे भी वंछित रह जाते हैं।  इसके अलावा आदेश बताते हैं कि खिलाड़ियों को डर लगता है कि जब वे खेल से अलग हो जाते हैं तो उनके पास काम करने के मौके नहीं होते।  

आदेश बताते हैं कि खेलों की ज्यादातर सुविधाएं शहरों में हैं, जिसके कारण गांव के खिलाड़ियों को संघर्ष करना पड़ता है। उन्हें शहर आ आकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है जिससे उनके प्रदर्शन पर फर्क पड़ता है। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को उनके नजदीक स्टेडियम उपलब्ध कराएं जाएं। 

देर आई, पर दुरुस्त आई सरकार, ओलंपिक पर किया फोकस

हालांकि अब खेल के क्षेत्र में ध्यान दिया जाने लगा है।  भारत ने खेलों में गहरी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है। खेलो इंडिया गेम्स जैसे कार्यक्रमों के लिए फंडिंग बढ़ रही है। साल 2019-2020 में खेलो इंडिया की फंडिग में 312.42 करोड़ का इजाफा देखा गया है, 578 करोड़ से इसकी फंडिग को बढ़ाकर 890.42 कर दिया है।  वहीं भारत की नई शिक्षा पॉलिसी में भी खेल पर काफी जोर दिया गया है। 2018 में लॉन्च हुए 'समग्र शिक्षा अभियान' में खेल को स्कूलों में शामिल करने पर खास जोर दिया है।  स्किम में कहा गया है कि हर स्कूल को खेल उपकरण प्रदान किये जाएंगे और खेल शिक्षा पाठ्यक्रम का एक अभिन्न हिस्सा होगी। 

इस बार 17 मेडलों की है उम्मीद

पिछले ओलंपिक में भारत ने 118 खिलाड़ी भेजे लेकिन इस बार 126 खिलाड़ी टोक्यो गए हैं। ओलंपिक विश्लेषक ग्रेसनोट्स का अनुमान है कि इस बार भारत ओलंपिक में निशानेबाजी में आठ पदक, मुक्केबाजी में चार, कुश्ती में तीन और तीरंदाजी और भारोत्तोलन में एक-एक पदक जीतेगा। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि भारत बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी और निशानेबाजी में  मेडल हासिल करेगा और इस ओलंपिक में भारत का शानदार प्रदर्शन देखने को मिलेगा। 

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