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राष्ट्रीय खेल दिवसः हिटलर से लेकर ब्रैडमैन तक जुड़े हैं ध्यानचंद के किस्से, जानें 8 फैक्ट्स

मेजर ध्यानचंद (साभारः गूगल)

29 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर मनाया जाता है। आज ही के दिन सन् 1905 में ध्यानचंद का जन्म इलाहाबाद में हुआ और आज उनकी 113वीं जयंती है। हर साल इसी दिन खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार भी दिए जाते हैं। क्या आपको पता है, जब महान क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन ने ध्यानचंद का खेल देखा तो क्या कहा, आइए जानते हैं हॉकी के जादूगर के बारे में कुछ फैक्ट्स...

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1. ध्यानचंद 16 साल की उम्र में भारतीय-ब्रिटिश सेना में लांस-नायक के पद पर शामिल हो गए थे। इसी दौरान उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया। उनके बेहतरीन खेल को देखते हुए ही ब्रिटिश गवर्मेंट ने उन्हें मेजर बनाया था।

2. ध्यानचंद ने 1928, 1932 और 1936 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और तीनों ही बार भारत ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता। 1948 में 43 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहा।

3. 1928 में एम्सटर्डम में हुए ओलंपिक खेलों में भारत की तरफ से उन्होंने सबसे ज्यादा गोल (14) किए। उसी दौरान एक स्थानीय समाचार पत्र ने लिखा कि, 'यह हॉकी नहीं बल्कि जादू था और ध्यानचंद हॉकी के जादूगर हैं।' यही वह समय था जब पहली बार उन्हें ये उपनाम दिया गया।

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4. 1935 में जब दुनिया के महान क्रिकेटर सर डॉन ब्रैडमैन और ध्यानचंद की मुलाकात एडीलेड में हुई तो उन्होंने कहा कि, 'आपको गोल करते हुए देखकर ऐसा लगता है, जैसे क्रिकेट में रन बन रहे हों।'

5. ध्यानचंद ने 1933 में बेईघटन कप फाइनल में कोलकाता कस्टम्स और झांसी हीरोज के बीच हुए मैच को अपना बेस्ट मैच बताया था।

6. ध्यानचंद का अविश्वसनीय खेल देखते हुए एक बार नीदरलैंड्स में उनकी हॉकी स्टिक तोड़कर देखा गया कि, कहीं उनकी स्टिक में चुंबक तो नहीं लगी जो गेंद को चिपकाए रखती हो।

7. बर्लिन ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद हिटलर ने उन्हें डिनर के लिए आमंत्रित किया। हिटलर ने उन्हें जर्मनी फौज में बड़े पद का लालच देकर जर्मनी की तरफ से हॉकी खेलने को कहा। लेकिन ध्यानचंद ने प्रस्ताव ठुकराते हुए कहा कि, हिंदुस्तान ही मेरा वतन है।

8. ध्यानचंद ने अपने 22 साल (1926-48) के करियर में 400 गोल किए।

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