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28 दिसंबर, 2020|10:05|IST

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हॉकी के मैदान से राजनीति के अखाड़े तक जानिए संदीप सिंह का पूरा सफरनामा

आइए एक नजर डालते हैं हॉकी के मैदान से राजनीति के अखाड़े तक कैसा रहा है संदीप सिंह का सफर...

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संदीप सिंह भारतीय हॉकी में एक बड़ा नाम हैं। उनका जीवन बहुत मायने में किसी सामान्य भारतीय की तरह ही चुनौतियों से भरा रहा है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद से निकलकर भारतीय हॉकी की दशकों तक सेवा करने वाले संदीप सिंह ने जिंदगी की हर चुनौती को पार कर ऊंचाइयां हासिल की। एक समय ऐसा भी आया जब संदीप सिंह का हॉकी करियर लगभग समाप्त माना जा रहा था। उन्हें ट्रेन में यात्रा के दौरान गलती से गोली लग गई थी। लेकिन उन्होंने उस बुरे दौर को भी पीछे छोड़ते हुए दमदार वापसी की और भारतीय हॉकी ​के सिरमौर बने। अब संदीप सिंह ने चुनावी राजनीति में भी जीत से शुरुआत की है। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें हरियाणा की पिहोवा विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। संदीप ने इस सीट पर जीत हासिल की। आइए एक नजर डालते हैं हॉकी के मैदान से राजनीति के अखाड़े तक कैसा रहा है संदीप सिंह का सफर...

बहुत कठिन रहा संदीप सिंह का जीवन 
अपने शुरुआती दिनों में संदीप सिंह को उनके कोच करतार सिंह ने ही इतना परेशान किया था कि वह एक समय हॉकी खेलना ही छोड़ने जा रहे थे। हालांकि, संदीप को अपने भाई बिक्रमजीत सिंह का साथ और समर्थन मिला। संदीप अपने भाई के लिए कुछ अच्छा करना चाहते थे। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के दम पर संदीप सिंह धीरे-धीरे भारतीय हॉकी में उभरने लगे। कई वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद साल 2004 में संदीप सिंह का सिलेक्शन कुआलालंपुर में खेले जाने वाले 'सुल्तान अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट' के लिए भारतीय टीम में हुआ। हालांकि, राष्ट्रीय टीम में चयन के बाद अगले 2-3 साल का समय संदीप सिंह के जीवन का सबसे बुरा दौर रहा। भारतीय हॉकी टीम उस टूर्नामेंट में आखिरी स्थान पर रही थी और संदीप सिंह का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं रहा था। साल 2006 के करीब तो संदीप का करियर लगभग समाप्त ही हो गया था।

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कमर के नीचे लग गई थी गोली
संदीप सिंह को विश्व कप में हिस्सा लेने जर्मनी जाना था और वह अपने टीम के साथियों के साथ के लिए कालका शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे थे। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के एक जवान की बंदूक से गलती वश गोली चल गई और जाकर संदीप सिंह के कमर के निचले हिस्से में लगी। संदीप सिंह करीब एक साल तक हॉस्पिटल में रहे और इस चोट से उबरने की प्रक्रिया उनके लिए बहुत ज्यादा दर्द देने वाली थी। संदीप के साथ इधर ये घटना घटी थी। वहीं, दूसरी ओर भारतीय हॉकी के साथ भी सबकुछ गलत हो रहा था। साल 2006 के विश्व कप में भारत 6 में से एक भी मैच नहीं जीत सका। साल 2008 में तो ये हालात हो गए थे कि भारतीय हॉकी टीम 80 वर्षों के इतिहास में पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी थी। उसे सैंटियागो में खेले गए क्वालीफाइंग मुकाबले में इंग्लैंड के हाथों 2-0 से हार का सामना करना पड़ा था।

संदीप ने हॉकी में की दमदार वापसी
शायद इस बुरे दौर ने संदीप सिंह को प्रेरणा दी और उन्होंने कुछ बड़ा करने की ठानी। उन्होंने अपने ड्रैग फ्लिक पर काम करना शुरू किया। साल 2009 से 2010 के दरमियां संदीप सिंह 145 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ड्रैग फ्लिक कर रहे थे। संदीप के ताकतवर ड्रैग फ्लिक को देखकर हॉकी जगत ने उन्हें 'फ्लिकर सिंह' नाम दे दिया था। वह अपने समय में हॉकी की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर रहे। संदीप सिंह ने एक बार फिर भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम में वापसी की और उन्हें साल 2009 के 'सुल्तान अजलान शाह टूर्नामेंट' के लिए कप्तान बनाया गया। संदीप ने दमदार प्रदर्शन किया। इस टूर्नामेंट में भारत ने मलेशिया और पाकिस्तान के खिलाफ जीत दर्ज की, जबकि इजिप्ट और न्यूजीलैंड के साथ ड्रॉ खेला। फाइनल में भारत का सामना मलेशिया से हुआ। संदीप सिंह की अगुवाई में भारतीय टीम ने कुल चौथी और 13 वर्षों में पहली बार इस टूर्नामेंट का खिताब जीता।

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अब राजनीति के मैदान में संदीप सिंह
संदीप सिंह ने इस टूर्नामेंट में भारत के लिए कुल 6 गोल दागे और एक सच्चे लीडर की तरह टीम का नेतृत्व किया। उन्हें 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' घोषित किया गया। साल 2010 के कॉमन वेल्थ गेम्स में भारत के पास खिताब जीतने का मौका था लेकिन फाइनल में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों 8-0 से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। संदीप सिंह तब तक भारतीय हॉकी के स्टार बन गए थे। संदीप के जीवन पर साल 2018 में 'सूरमा' नाम से फिल्म भी बनी है। इसमें संदीप सिंह का किरदार मशहूर पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ ने निभाया है। उनके अपोजिट में तापसी पन्नू हैं। 

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  • Web Title:Know the complete journey of Sandeep Singh from the field of hockey to the arena of politics