Hindi Newsखेल न्यूज़Kalyan Chaubey ahead of Bhaichung Bhutia as football body set to get its first Player President

AIFF चुनाव: बाईचुंग भूटिया पर कल्याण चौबे का पलड़ा भारी, महासंघ को मिलेगा पहला ''खिलाड़ी'' अध्यक्ष

शुक्रवार को होने वाले चुनाव में एआईएफएफ अध्यक्ष पद की दौड़ में बाईचुंग भूटिया का सीधा मुकाबला मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के पूर्व गोलकीपर कल्याण चौबे से होगा।

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Himanshu Singh एजेंसी, नई दिल्लीThu, 1 Sep 2022 08:12 PM
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अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) में बदलाव की बयार बह रही है और महासंघ को शुक्रवार को होने वाले चुनाव में अपने 85 साल के इतिहास में पहला ऐसा अध्यक्ष मिलेगा जो पूर्व खिलाड़ी होगा। शुक्रवार को होने वाले चुनाव में एआईएफएफ अध्यक्ष पद की दौड़ में भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक 45 साल के बाईचुंग भूटिया का सीधा मुकाबला मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के पूर्व गोलकीपर कल्याण चौबे से होगा।

चौबे को गुजरात और अरुणाचल प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों से समर्थन मिलने के कारण अध्यक्ष पद की दौड़ में जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। चौबे पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्हें पर्याप्त राजनीतिक समर्थन मिल रहा है जो इस खेल के खेल संस्थानों के चुनाव में काफी महत्वपूर्ण होता है। इस तरह की चर्चा है कि चौबे को पूर्वोत्तर के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में से एक का समर्थन हासिल है जिसकी भारतीय खेलों में सक्रिय रुचि है। भारतीय फुटबॉल से जुड़े कई लोगों का मानना है कि यही कारण है कि भूटिया के घरेलू राज्य संघ सिक्किम ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन नहीं किया है।

दो अन्य शीर्ष पदों महासचिव और कोषाध्यक्ष के लिए भी दो उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है। राजस्थान फुटबॉल संघ के अध्यक्ष और कांग्रेस के नेता मानवेंद्र सिंह और एनए हारिस उपाध्यक्ष पद के लिए आमने-सामने हैं। हारिस कर्नाटक फुटबॉल संघ के अध्यक्ष और राज्य में कांग्रेस के विधायक हैं।

मानवेंद्र के राज्य संघ ने भूटिया की उम्मीदवारी का अनुमोदन किया था। कोषाध्यक्ष पद के लिए आंध्र प्रदेश राज्य संघ के अध्यक्ष गोपालकृष्ण कोसाराजू और अरुणाचल प्रदेश के किपा अजय दो उम्मीदवार मैदान में हैं। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के तौर पर भूटिया का नाम प्रस्तावित करने वाले कोसाराजू ने 26 अगस्त को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए एक पत्र लिखा था। सूत्रों ने हालांकि कहा कि उन्होंने नाम वापस लेने के लिए कोई फॉर्म नहीं भरा था और इसलिए उनकी उम्मीदवारी अभी भी बनी हुई है। 

नई एआईएफएफ अधिकारियों के सामने काफी जिम्मेदारियां होंगी जिसमें सबसे महत्वपूर्ण अक्टूबर में फीफा महिला अंडर -17 विश्व कप का सुचारू संचालन है। नामांकन वापसी की समय सीमा मंगलवार दोपहर एक बजे समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने चुनाव के लिए प्रत्येक पद के उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की।

निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचक मंडल के रूप में राज्य संघों के 34 प्रतिनिधियों की सूची जारी की है। एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, एक कोषाध्यक्ष और 14 कार्यकारिणी सदस्यों के पदों के लिए चुनाव होना है। छह पूर्व खिलाड़ियों (चार पुरुष और दो महिलाओं) को बाद में मतदान अधिकार के साथ कार्यकारी समिति के सदस्यों के रूप में शामिल किया जाएगा।

कार्यकारी समिति के सदस्यों की समान संख्या के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने से सभी 14 उम्मीदवारों को विजेता घोषित किए जाने की तैयारी है। इसमें जी पी पालगुना, अविजित पॉल, पी अनिलकुमार, वलंका नताशा अलेमाओ, मालोजी राजे छत्रपति, मेनला एथेनपा, मोहन लाल, आरिफ अली, के नेइबोउ सेखोज, लालनघिंग्लोवा हमार, दीपक शर्मा, विजय बाली और सैयद इम्तियाज हुसैन शामिल हैं।

इससे पहले चुनावों का आयोजन 28 अगस्त को उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति के तत्वावधान में होना था। उच्चतम न्यायालय ने भारत में महिला अंडर -17 विश्व कप की मेजबानी को बचाने के लिए 22 अगस्त को एक फैसले में सीओए को हटा दिया था और 36 पूर्व खिलाड़ियों को निर्वाचक मंडल में शामिल करने की अनुमति नहीं दी तथा चुनाव को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया था। फीफा के एआईएफएफ को निलंबित करने के बाद उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला दिया था।

फुटबॉल की वैश्विक संचालन संस्था फीफा ने हालांकि 26 अगस्त को भारत पर लगा प्रतिबंध हटा दिया और देश में अक्टूबर में अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी का रास्ता साफ हो गया। भूटिया ने अपने करियर के दौरान 104 मैच में भारत का प्रतिनिधित्व किया और एक खिलाड़ी के रूप में 2011 में संन्यास लेने तक 40 गोल दागे जो उस समय देश की ओर से रिकॉर्ड था। भूटिया 1999 में यूरोपीय क्लब से अनुबंध करने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने जब इंग्लैंड की टीम बरी एफसी ने उन्हें अपने साथ जोड़ा।

पूर्व भारतीय कप्तान भूटिया अपने करियर के दौरान मोहन बागान, ईस्ट बंगाल, सेलंगोर और यूनाईटेड सिक्किम जैसे प्रमुख भारतीय क्लब की ओर से खेले। खिलाड़ी के रूप में संन्यास के बाद भूटिया ने यूनाईटेड सिक्किम जैसी टीम का प्रबंधन किया और एआईएफएफ की तकनीकी समिति के प्रमुख भी रहे।

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भूटिया के प्रतिद्वंद्वी चौबे ने प्रतिष्ठित टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) में खेल के गुर सीखे। चौबे ने 1996 में मोहन बागान की ओर से सीनियर क्लब फुटबॉल में पदार्पण किया। वह 1997 से 2003 के बीच ईस्ट बंगाल, जेसीटी और सलगांवकर जैसी टीम की ओर से खेले।

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