Hima Das wins third gold in 11 days - हिमा दास का ट्रिपल धमाका, 11 दिन में जीता तीसरा गोल्ड DA Image

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हिमा दास का ट्रिपल धमाका, 11 दिन में जीता तीसरा गोल्ड

भारत की शीर्ष महिला धावक हिमा दास ने दो सप्ताह के भीतर तीसरा स्वर्ण पदक जीता है। हिमा ने यहां क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महिलाओं की 200 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

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भारत की शीर्ष महिला धावक हिमा दास ने दो सप्ताह के भीतर तीसरा स्वर्ण पदक जीता है। हिमा ने यहां क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महिलाओं की 200 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय धावक ने शनिवार को हुई इस रेस को 23.43 सेकेंड में पूरा किया और पहले पायदान पर रही। 

इस बीच, नेशनल रिकॉर्ड होल्डर मोहम्मद अनस ने भी 400 मीटर में सोना जीता। उन्होंने अपनी रेस 45.21 सेकेंड में पूरी की। हिमा ने दो जुलाई को साल की अपनी पहली प्रतिस्पर्धा 200 मीटर रेस में 23.65 सेकेंड का समय निकालर सोना जीता था। यह रेस पोलैंड में हुई पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स के तहत हुई थी।  

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इसके बाद, विश्व जूनियर चैंपियन और 400 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्डधारक हिमा ने जुलाई आठ को पोलैंड में हुए कुंटो एथलेटिक्स टूर्नामेंट में 200 मीटर की रेस में 23.97 सेकेंड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

वर्ल्ड जूनियर चैम्पियन हिमा का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत समय 23.10 सेकेंड है, जो उन्होंने पिछले साल बनाया था। बता दें कि हिमा पिछले कुछ महीनों से पीठ दर्द से परेशान रही थी और इस दर्द के बाद उन्होंने फिर से दमदार वापसी की है।

गौरतलब है कि हिमा दास का जन्म 9 जनवरी 2000 को असम राज्य के नागाव जिले के ढिंग में हुआ था। हिमा के पिता रोंजित दास किसानी करते हैं, जबकि माताजी जोमाली दास गृहिणी हैं। कुल 16 सदस्यों के घर में आर्थिक हालात शुरू से ही खराब रहे। बस किसी तरह खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है। परिवार में हिमा और उनके माता-पिता के अलावा 5 भाई और बहन हैं। हिमा ने अपनी शुरुआती पढाई गांव से ही की। खेलों में रुचि होने और पैसों की तंगी के चलते हिमा अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं।

कोचिंग के लिए नहीं थे पैसे
जब 2017 में हिमा गुवाहाटी में एक कैम्प में हिस्सा लेने आई थीं तब उनकी मुलाकात एक एथलेटिक्स के कोच से हुई। उन्होंने ही हिमा को एथलीट के गुर सिखाये। बेहतर कोचिंग के लिए गुवाहाटी भेजने के लिए हिमा के माता-पिता सक्षम नहीं थे, ऐसे में वहां हिमा के रहने खाने का खर्चा कोच ने उठाया।

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