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इंटरव्यू:भारतीय सेना में प्रमोशन मिल जाए इसलिए करता था शूटिंग,अब विश्व में मिल गई पहचान-जीतू राय

Indian Shooter Jitu Rai

जीतू राय, ये नाम है संघर्ष से उत्कर्ष और असफलता से सफलता तक के सफर का। नेपाल के संखुवासभा जिले के एक छोटे से गांव में जन्में जीतू राय आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। जब भारत में निशानेबाजी (शूटिंग) की बात आती है तो जीतू राय का नाम शीर्ष खिलाड़ियों में गिना जाता है। साल 2006 में पिता की मृत्यु के बाद जीतू राय भारत आ गए और इंडियन आर्मी ज्वाइन कर लिया। इस प्रकार जीतू भारत के स्वतः नागरिक बन गए। जीतू राय को निशानेबाजी में कोई दिलचस्पी नहीं थी और इस खेल से पहली बार उनका परियच सेना में आने के बाद ही हुआ। नेपाल के एक छोटे से गांव में जन्म लेने से लेकर एक विश्वस्तरीय निशानेबाज बनने तक जीतू राय का यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जीतू ने आॅस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित हुए 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। विश्वस्तर पर शूटिंग में देश के लिए कई मेडल्स जीत चुके जीतू राय ने Livehindustan.com के पत्रकार दीपक मिश्रा को दिए गए इंटरव्यू में अपने अब तक के जीवन सफर पर खुलकर बातचीत की। आप भी पढ़ें...

प्रश्न: रियो ओलंपिक में देश को आपसे पदक की उम्मीद थी, लेकिन दुर्भागयवश ऐसा नहीं हो पाया। अब गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर आप क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर: मैं बहुत खुश हूं कि मैंने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता है। रियो ओलंपिक में मैं मेडल नहीं जीत पाया था, शायद मेरी किस्मत में नहीं लिखा होगा। जो नहीं हुआ उसे अब याद ही क्यों करना, मैं उसे भूल भी गया हूं। मैंने रियो में मिली असफलता को भूल कर आगे के लक्ष्य पर फोकस किया, तभी मुझे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल मिला है। मैंने जिस तरह से परिश्रम किया था, तैयारी की थी उसी का परिणाम मुझे मिला है। मैं गोल्ड मेडल जीतकर बहुत ही खुश हूं।

प्रश्न: शूटिंग में आपको कोई दिचलस्पी नहीं थी और अब आप इस खेल के विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं, ये कैसे संभव हुआ?

उत्तर: हां, मुझे शूटिंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था। मैंने गगन नारंग, अभिनव बिंद्रा और राज्यवर्धन सिंह राठौर के बारे में सुना था, लेकिन ये नहीं जानता था कि इनकी उपलब्धियां क्या हैं। मैं फौज में था, ट्रेनिंग के दौरान ही शूटिंग शुरू की। मैं ये सोच कर शूटिंग नहीं करता था कि इसमें मुझे भविष्य बनाना है। धीरे-धीरे मैं आर्मी की शूटिंग टीम में आ गया। फौज के अंदर खेलों में अच्छा करने वालों को प्रमोशन मिलता है, इसलिए शूटिंग में अच्छा करने के प्रति मेरी दिलचस्पी बढ़ने लगी। यहां मुझे पता चला की शूटिंग में फ्यूचर अच्छा है, मैं इसमें अपना और देश दोनों का नाम रोशन कर सकता हूं। इसके बाद से ही मैंने शूटिंग को गंभीरता से लिया और आज यहां तक पहुंच गया। 

प्रश्न: आपका जन्म नेपाल के एक छोटे से गांव में हुआ था, वहां से भारतीय सेना में कैसे आए? इस बारे में बताएं।

उत्तर: मेरा जन्म नेपाल के संखुवासभा जिले के एक गांव में हुआ है। वहां से मैं 2006 में लखनऊ आया। मैं लखनऊ में ही भारतीय फौज में भर्ती हुआ। मेरा पापा भी भारतीय फौज में थे। फौज में भर्ती होने के बाद ही शूटिंग की शुरुआत हुई। फौज में मुझे शूटिंग करनी ही पड़ती थी, तभी मेरी दिलचस्पी भी जगी और मैं आज यहां पहुंच गया। मैं एक नॉर्मल सिपाही के तौर पर फौज में भर्ती हुआ था, दो साल की ट्रनिंग की। सात साल तक मैं सिपाही रहा। 2014 में मैं हवलदार बन गया, फिर जूनियर कमिशंड अफसर बन गया।

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प्रश्न: साल 2020 में जापान के टोक्यो में होने वाले ओलंपिक के लिए आपका क्या लक्ष्य है, क्या रोडमैप है?

उत्तर: मुझे रियो ओलंपिक में पदक जीतने की पूरी उम्मीद थी। मैंने सपना देखा था और मुझे लग रहा था कि मैं ये सपना पूरा कर सकता हूं। मेरे सभी दोस्तों और देशवासियों को मुझसे उम्मीद थी कि मैं रियो में पदक जीतूंगा। मुझे भी अपनी काबिलियत पर कोई शक नहीं था, लेकिन मेरी किस्मत में नहीं रहा होगा। मैंने कोशिश पूरी की और फाइनल तक पहुंचा भी था। फाइनल में पहुंचने के बाद मेडल जीत पाना शायद मेरी किस्मत में नहीं था। हालांकि, ऐसा नहीं था कि रियो में मेरा सपाना टूट गया तो मेरा दिल टूट गया। टोक्यो ओलंपिक के लिए मेरी तैयारी अच्छी चल रही है। मेरा पहला लक्ष्य कोरिया में होने वाले वर्ल्ड चैम्पियनशिप में ओलंपिक कोटा हासिल करना है। 

प्रश्न: आपको एक विश्वस्तरीय खिलाड़ी बनाने में, आपको मिली सफलता में भारतीय सेना की भूमिका को किस रूप में देखते हैं?

उत्तर: मैं आपको दिल से कहना चाहूंगा कि आज मैं जो कुछ भी हूं भारतीय सेना की वजह से ही हूं। शायद मैं फौज में नहीं होता तो यहां नहीं होता, गांव में कहीं काम कर रहा होता। भारतीय सेना के सपोर्ट की वजह से ही मैं शूटिंग का इतना बड़ा खिलाड़ी बन पाया हूं। मैं इसके लिए भारतीय सेना का आभारी हूं। सेना के बाद 'इंडियन राइफल एसोसिएशन' और 'ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट' का मेरी सफलता में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन दोनों संगठनों की तरफ से भी मुझे बहुत सहयोग मिला है। 

प्रश्न: आप शूटिंग में किसको अपना आदर्श मानते हैं, कोई ऐसा व्यक्ति जिससे आपको प्रेरणा मिलती हो?

उत्तर: जब विजय कुमार ने 2012 में लंदन ओलंपिक में 25 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता था तो मुझे वहीं से प्रेरणा मिली कि मैं भी ये कर सकता हूं। विजय कुमार भी सेना में मेरी ही तरह एक सिपाही थे। जब उन्होंने ओलंपिक में पदक जीता तो मैं उनसे काफी प्रभावित हुआ था। मुझे लगा कि जब ये कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता। दरअसल विजय कुमार से भी प्रेरित होकर मैंने शूटिंग को काफी गंभीरता से लिया। मेरे लिए विजय कुमार ही प्रेरणा हैं, मैं उनको बहुत मानता हूं। 

प्रश्न: आप खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से चुस्त दुरुस्त रखने के लिए क्या करते हैं, युवाओं को इस बारे में क्या सलाह देना चाहेंगे?

उत्तर: मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि कोई भी लक्ष्य हासिल करने के लिए मानसिक और शारीरिक तौर पर फिट होना बहुत जरूरी होता है। मैं खुद को फिजिकली फिट रखने के लिए जिम करता हूं और मेंटली फिट रहने के लिए योगा-मेडिटेशन करता हूं।

AUDIO:कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट शूटर जीतू राय का टेलीफोनिक इंटरव्यू

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  • Web Title:Gold Coast Commonwealth Games 2018 10 meter Air Pistol Shooting Event gold Medalist Shooter Jitu Rai Exclusive Interview with Live Hindustan