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29 फरवरी, 2020|11:16|IST

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पटना में अभिनव बिंद्रा बोले, निशानेबाजों से ओलंपिक में पदक की उम्मीद

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ओलंपिक में भारत के एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिन्द्रा ने पटना में ‘हिन्दुस्तान’ के एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय युवा निशानेबाजों की खुलकर तारीफ की। उन्हें कई निशानेबाजों से ओलंपिक में पदक की उम्मीद है। खासकर सौरभ चौधरी और मनु भाकर में काफी क्षमता दिखती है

बिहार की श्रेयसी 
श्रेयसी ने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्हें यह प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। उनका पहला फोकस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना होना चाहिए। ग्लासगो कॉमनवेल्थ में वह हमारी टीम में थीं और उन्होंने पदक भी जीता था। वह अच्छा खेल जारी रखती हैं तो उनसे भी उम्मीदें हैं।  

मनु और सौरभ, दोनों खिलाड़ियों में बहुत प्रतिभा है। हाल के दिनों में दोनों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे बहुत उम्मीदें हैं। अगर वर्ल्डकप में वे रिकॉर्ड बना रहे हैं तो बेशक वह ओलंपिक में भी पदक जीत सकते हैं। मेडल आना या न आना उस दिन पर निर्भर करता है पर दोनों में मेडल जीतने की क्षमता जरूर है।

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थोड़ा विस्तार करते हुए अभिनव कहते हैं, ‘सौरभ और मनु ही क्यों, अपूर्वी चंदेला भी विश्व की नंबर एक शूटर हैं। अच्छी बात यह है कि इसके अलावा भी कई निशानेबाज हैं जो अच्छा प्रदर्शन करे रहे हैं और देश को पदक दिला सकते हैं। यह हमारे लिए खुशी की बात है कि हम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं हैं।

खेलो इंडिया पर
जहां तक मुझे पता है, खेलो इंडिया युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का अच्छा प्लेटफॉर्म है। अगर हम ग्रासरूट पर ज्यादा ध्यान देंगे तो जरूर अच्छे खिलाड़ी तैयार होंगे।

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नेशनल गेम्स
नेशनल गेम्स का निरंतर न होना ही इसका महत्व खत्म होना है। अगर गेम्स कैलेंडर के हिसाब से लेट होते चले जाते हैं तो उसकी अहमियत कम होती चली जाती है। नेशनल गेम्स का आयोजन हमेशा चुनौतिपूर्ण रहा है। हालांकि अब भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन में कुछ सक्रियता दिख रही है तो कुछ अच्छे की उम्मीद कर सकते हैं।

भारत में लीगों का आयोजन फायदेमंद
लीग के साथ ग्रासरूट लेवल पर काम करें तो बेहतर ही है। इससे एमेच्योर गेम्स को कुछ खास नुकसान नहीं हैं। आज हम देख रहे हैं कि जो भी लीग भारत में हुए हैं वे अच्छा ही परिणाम दे रहे हैं। बैडमिंटन, कबड्डी और कुश्ती के लीग इसके उदाहरण हैं। खिलाड़ियों को अच्छे पैसे भी मिल जाते हैं और उन्हें विदेशी खिलाड़ियों से प्रतिद्वंद्वता भी मिलती है। तो इससे उनके खेल में निखार आता चला जाता है। 

क्रिकेट की अपनी जगह 
हर देश में कोई न कोई खेल ज्यादा लोकप्रिय रहता ही है। यहां क्रिकेट ज्यादा लोकप्रिय है। इसका मतलब ये नहीं है कि दूसरे खेल नहीं बढ़ रहे। बैडमिंटन जैसे खेलों ने हाल के वर्षों में काफी तरक्की की है। तो कुल मिलाकर यही कहना सही होगा कि क्रिकेट को अपनी जगह छोड़ दें, अपना जो खेल है उस पर ध्यान दें तो जरूर फायदा मिलेगा। 
पालिटिक्स में जाने का कोई इरादा नहीं, राजनीति में जाने का मेरा कोई इरादा नहीं है।

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  • Web Title:former shooter abhinav bindra says our shooter will perform better and win medals in olympic