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Asian Games: जब सियोल में दौड़कर पीटी ऊषा दुनिया में बन गईं सनसनी

वैसे तो, पीटी ऊषा सियोल एशियाई खेल से पहले जकार्ता में हुए एशियन ट्रैक एंड फील्ड टूर्नामेंट में सनसनी बन गई थीं। पर सियोल में उन्होंने पूरे एशिया का दिल जीत लिया।

PT Usha

1970 में एशियन मेजबानी से हाथ खड़े करने वाले दक्षिण कोरिया ने 1986 में सियोल में खेल कराए। दुनिया ने ‘उड़न परी' पीटी ऊषा का करिश्मा देखा पर भारत का ओवरऑल फीका रहा। चीन, कोरिया और जापान में खेल मैदान पर टक्कर देखने को मिली, जिसमें चीन ने बाजी मारी।

वैसे तो, पीटी ऊषा सियोल एशियाई खेल से पहले जकार्ता में हुए एशियन ट्रैक एंड फील्ड टूर्नामेंट में सनसनी बन गई थीं। पर सियोल में उन्होंने पूरे एशिया का दिल जीत लिया। उन्होंने तीन स्वर्ण के अलावा रिले में एक स्वर्ण व रजत पदक जीता। वह यह कारनामा करने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनीं। ऊषा ने 200 मीटर, 400 मीटर और 400 मीटर बाधा दौड़ में स्वर्ण जीते। पीटी ऊषा ने बताया, "सियोल एशियाई खेलों से पहले ही मैं एशिया में सर्वश्रेष्ठ एथलीट बन चुकी थी। 1985 में जकार्ता में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मैंने 100, 200, 400 दौड़ और 400 मीटर हर्डल में स्वर्ण पदक जीते थे। यही नहीं, 4 गुणा 400 मीटर रिले दौड़ का स्वर्ण पदक भी जीता। मैं उस दौर में बहुत फिट थी।"ॉ

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पांच गोल्ड जीतने का भरोसा, लेकिन डर भी
उन्होंने कहा, "सियोल एशियन गेम्स से पहले मैं पूरी तरत आश्वस्त थी कि पांच स्वर्ण पदक जीतूंगी। पर भीतर ही भीतर एक अजीब-सा डर भी था। यह डर और घबराहट हर खिलाड़ी के भीतर होती है, जब वह मैदान या ट्रैक पर उतरता है। मैं चार तो जीत गई लेकिन 100 मीटर की दौड़ में फिलिपींस की लीडिया मुझसे बाजी मार ले गई। लीडिया ने वाकई बहुत अच्छी रेस लगाई थी। ये एशियाई खेल मेरे जीवन का सुनहरा दौर था।

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  • Web Title:Asian games history-pt usha became sensation by winning 4 golds at seoul in 1986