Asian Games 2018- Shailaja jain coach of iran women kabbadi team lead to historic defeat of india - Asian Games: एक भारतीय ने ही बनाया था इंडियन कबड्डी की ऐतिहासिक हार का प्लान DA Image

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Asian Games: एक भारतीय ने ही बनाया था इंडियन कबड्डी की ऐतिहासिक हार का प्लान

ईरान की महिला टीम की ऐतिहासिक जीत का सबसे बड़ा श्रेय जाता है कोच शैलजा जैन को। 62 साल की शैलजा जैन ने अपने जीवन के तीस दशक महाराष्ट्र में बच्चों को कबड्डी की कोचिंग देते हुए गुजारे।

Iran women team wins gold beating india (photo - AFP)

भारत के पास एशियाई खेलों अब तक सिर्फ कबड्डी ही एक ऐसा खेल था जिसमें आज तक कोई नहीं हरा सका था और एक गोल्ड मेडल तय माना जाता था। लेकिन जकार्ता में जारी 18वें एशियाई खेलों के दौरान ईरान ने इतिहास बदल दिया और 28 सालों में पहली बार भारत की टीमें बिना गोल्ड मेडल के भारत लौटी हैं। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पुरुष और महिला दोनों इवेंट में भारत को हराने वाले ईरान की जीत की मास्टरमाइंड एक भारत की ही कबड्डी खिलाड़ी है।

शुक्रवार (24 अगस्त) को ईरान की महिला टीम ने भारतीय टीम को 27-24 से मात देकर गोल्ड मेडल की हैट्रिक लगाने से रोक दिया। ईरान की महिला टीम की ऐतिहासिक जीत का सबसे बड़ा श्रेय जाता है कोच शैलजा जैन को। 62 साल की शैलजा जैन ने अपने जीवन के तीस दशक महाराष्ट्र में बच्चों को कबड्डी की कोचिंग देते हुए गुजारे। कबड्डी में अच्छा अनुभव होने के बावजूद कभी शैलजा को भारतीय टीम का कोच बनने का मौका नहीं मिला। पिछले साल ईरान की ओर से शैलजा के पास महिला कबड्डी टीम को कोच करने का शानदार ऑफर आया जिसके बाद ईरानी कबड्डी की किस्मत बदलना शुरू हो गई।

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ईरान की महिला टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद शैलजा जैन ने कहा कि इसका श्रेय उन लोगों को जाता है जिन्होंने टीम को निचले पायदान से खड़ा किया। उन्होंने कहा, ''कई भारतीय कोच वहां गये हैं लेकिन उनके लिए यह कई वर्षों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। किसी कोच के पास कोई जादू नहीं है कि टीम को छह महीने में बदल दे। उन्हें (कोच को) इसका श्रेय इसलिये मिल रहा है क्योंकि टीम ने उनके रहते जीत दर्ज की।" 

'बिना गोल्ड के भारत नहीं लौटना चाहती थी' 
शैलजा ने बताया कि जब मैं पहली बार ईरान गई तो मेरा लक्ष्य था सबसे अच्छा कोच साबित होना और अब हमारे पास वो नजीता आ गया है। फाइनल में जैसे ही ईरान ने जीत हासिल की वैसे ही शैलजा के आंसूं छलक पड़े। उन्होंने कहा कि वह अब गौरव के साथ देश लौटेंगी। शैलाज का कहना है, ''मैंने उन्हें (ईरान महिला टीम) कहा था कि मैं बिना स्वर्ण पदक के भारत नहीं लौटना चाहती। मैंने उन्हें बताया कि मैं कोई भेंट नहीं चाहती, बस स्वर्ण पदक चाहती हूं, और उन्होंने ऐसा ही किया।" शैलजा बताती हैं कि उन्होंने पहले इस कोचिंग जॉब से इनकार कर दिया था लेकिन और बेहतर ऑफर मिलने के बाद वो ईरान जाने के लिए सहमत हो गईं। 

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खिलाड़ियों को सिखाया योग और प्राणायाम
ईरान महिला टीम को तैयार करने के लिए शैलजा खिलाड़ियों को योग और प्राणायाम सिखाया और साथ ही सांस लेने की कुछ क्रियाएं भी सिखाईं। टीम की खिलाड़ियों को बेहतर तरह से समझने और खुद की बात समझाने के लिए उन्होंने फार्सी भाषा (ईरान में बोली जाने वाली) भी सीखी। वो कहती हैं, 'सबसे पहले मैंने एक कबड्डी वॉट्सऐप ग्रुप बनाया जिसमें रोज खिलाड़ियों को प्रोतसाहन करने के लिए मैसेजेस साझा करती थी। हमने 42 खिलाड़ियों के साथ शुरू किया ता और चुनते-चुनते 12 लड़कियों की टीम तैयार हो गई।'

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'फाइनल में भारत की हार से दुख हुआ'
फाइनल मैच के दौरान शुरू में ईरान 11-13 से भारत से पिछड़ रहा था। लेकिन हाफ टाइम में शैलजा ने खिलाड़ियों के बात करके शानदार वापसी करने की रणनीति बनाई। शैलजान कहती हैं, 'मुझे दुख है कि भारत हार गया। हर भारतीय की तरह, मैं भी अपने देश से प्यार करती हूं। लेकिन मेरा सबसे बड़ा प्यार है कबड्डी और इस टीम की कोच होने के नाते मेरे दिमाग में उस समय सिर्फ ईरान था।' बता दें कि एशियन गेम्स के साथ ही शैलजा जैन का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वो भविष्य में किसी और देश को कोचिंग देने के बारे में सोचेंगी।  

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