Commonwealth Games 2026: नीरज चोपड़ा नहीं दिला पाए भारत को गोल्ड मेडल, श्रीलंका के खिलाड़ी ने जीता सोना

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Commonwealth Games 2026 Live: कॉमनवेल्थ गेम्स के 9वें दिन भारत के नीरज चोपाड़ा भाला फेक प्रतियोगिता में ऐक्शन में थे। हालांकि, वे देश को गोल्ड मेडल का नहीं दिला पाए हैं। गोल्ड मेडल श्रीलंका के खिलाड़ी रुमेश ने जीता है। नीरज को रजत और यश वीर को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को गोल्ड नहीं दिला सके नीरज चोपड़ा।

Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स के 9वें दिन भारत के नीरज चोपाड़ा भाला फेक प्रतियोगिता में ऐक्शन में थे। हालांकि, वे देश को गोल्ड मेडल का नहीं दिला पाए हैं। गोल्ड मेडल श्रीलंका के खिलाड़ी रुमेश ने जीता है। नीरज को रजत और यश वीर को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने रजत पदक जीता, जबकि यश वीर सिंह ने भारत के लिए कांस्य पदक हासिल किया। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने स्वर्ण पदक जीता। नीरज का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 85.83 मीटर था, जबकि यश वीर ने 85.41 मीटर का थ्रो किया। गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी रुमेश का थ्रो 89.75 मीटर रहा। वहीं, मौजूदा ओलंपिक चैंपियन और बर्मिंघम 2022 के डिफेंडिंग चैंपियन, पाकिस्तान के अरशद नदीम, सिर्फ तीन थ्रो के बाद ही टूर्नामेंट से बाहर हो गए। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के कुल पदकों की संख्या 23 हो गई है। भारत ने अब तक पांच स्वर्ण पदक, 13 रजत और 6 कांस्य पदक जीते हैं और 10वें रैंक पर है।

श्रीलंका के रुमेश ने 89 मीटर से अधिक का थ्रो फेककर नीरज चोपड़ा को हराया और गोल्ड मेडल जीता

फाइनल में खिलाड़ियों के थ्रो की दूरी (मीटर में)

नीरज चोपड़ा की थ्रो दूरी: 80.97 मीटर | 85.83 मीटर (सीज़न का सर्वश्रेष्ठ) | 81.29 मीटर | 80.73 मीटर | X | X

यश वीर सिंह द्वारा फेंकी गई दूरी: X | 78.55 मीटर | 81.33 मीटर | X | 76.95 मीटर | 85.41 मीटर (व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ)

रोहित यादव की थ्रो दूरी: 77.50 मीटर | 81.56 मीटर | X | 73.70 मीटर | X | 79.55 मीटर

अरशद नदीम द्वारा फेंकी गई दूरी (तीन थ्रो के बाद बाहर): X | 77.41 मीटर | 75.39 मीटर

रुमेश थारंगा पथिराज की थ्रो दूरी: X | 89.75 मीटर | X | X | X | X

बुधवार को क्वालीफाइंग राउंड में नीरज ने 79.61 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ पांचवां स्थान हासिल किया, जबकि रोहित (78.37 मीटर) और यशवीर (78.36 मीटर) क्रमशः नौवें और दसवें स्थान पर रहे। क्वालीफाई कर लेने के बाद नीरज और रोहित ने अपना तीसरा और अंतिम थ्रो नहीं किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स के 9वें दिन नीरज चोपड़ा के इवेंट से पहले भारत ने जूडो में दो स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीते। पहले अस्मिता डे ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। अस्मिता डे ने शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। महिलाओं के 48 किग्रा फाइनल में अस्मिता ने ग्लासगो में जूडो में भारत को पहला पदक दिलाया। उन्होंने सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड की समर शॉ को 'यूको' से हराया था। अस्मिता के गोल्ड जीतने के आधे घंटे बाद ही हर्ष सिंह ने भी इतिहास रच दिया है। हर्ष भारत के पहले ऐसे पुरुष जुडको बन गए हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। फाइनल में हर्ष का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज से था, जहां उन्होंने जीत हासिल की और भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। हर्ष के बाद जूडो में ही यामिनी मौर्य को इंग्लैंड की खिलाड़ी से फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। महिला -57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में यामिनी मौर्या को एसल्या टोपराक (इंग्लैंड) से पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा।

नीरज चोपड़ा ने जीता रजत, यश वीर को कांस्य

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने रजत पदक जीता, जबकि यश वीर सिंह ने भारत के लिए कांस्य पदक हासिल किया। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने स्वर्ण पदक जीता। नीरज का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 85.83 मीटर था, जबकि यश वीर ने 85.41 मीटर का थ्रो किया।

नीरज चोपड़ा ने जीता रजत पदकयश वीर सिंह ने कॉमवेल्थ गेम्स में जीता कांस्य पदक

अस्मिता डे ने जीता स्वर्ण

अस्मिता डे ने शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। अस्मिता डे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में स्कॉटलैंड की समर शॉ को 'युको' के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया। एक समय हार की कगार पर पहुंच चुकीं अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की। इससे पहले अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को 'इप्पोन' से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी। जूडो में 'इप्पोन' को सर्वोच्च स्कोर माना जाता है जिसके मिलते ही मुकाबला समाप्त हो जाता है। 'युको' अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर है।

अस्मिता डे ने जीता गोल्ड मेडल (फाइल फोटो)

हर्ष सिंह ने भी जीता स्वर्ण पदक

पुरुष 60 किग्रा वर्ग में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को 'वाजा-आरी' के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया। उन्होंने फाइनल में भी सफलता प्राप्त की और स्वर्ण पदक जीता। भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स में यह 6वां स्वर्ण पदक है। हर्ष ने क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने के सफर में मलावी के चिकोंडी काथेवेरा को 'इप्पोन' से मात दी और फिर वानुआतु के एलन मोंथुएल को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। फाइनल में हर्ष का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज से था, जहां उन्होंने जीत हासिल हुई। और भारत को स्वर्ण पदक मिला। जूडो में 'वाजा-आरी' दूसरा सबसे बड़ा स्कोर होता है, जो खिलाड़ी को मुकाबले में महत्वपूर्ण बढ़त दिलाता है।

हर्ष सिंह ने जीता गोल्ड मेडल (फाइल फोटो)

यामिनी को रजत पदक से करना पड़ा संतोष

महिला वर्ग में यामिनी मौर्य ने भी दमदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेटेनबाख को 'इप्पोन' से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से था जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले यामिनी ने घाना की फ्रेमा अग्येई को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। यामिनी ने भारत को रजत पदक दिलाया। महिला -57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में यामिनी मौर्या को एसल्या टोपराक (इंग्लैंड) से पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा।

यामिनी मौर्या ने जीता रजत पदक (फाइल फोटो)

महिला 52 किग्रा वर्ग में श्रद्धा कदुबाल चोपड़े पदक की दौड़ से बाहर हो गईं। रेपेचेज मुकाबले में उन्हें वेल्स की लोला हॉडसन ने युको से हराया। श्रद्धा ने इससे पहले सिएरा लियोन की जेन मासाक्वॉई को इप्पोन से पराजित किया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की टिंका ईस्टन के खिलाफ उन्हें हार मिली। पुरुष 66 किग्रा वर्ग में रोहित बसीर मजगुल का सफर भी रेपेचेज में समाप्त हो गया। उन्हें इंग्लैंड के माइकल फ्रायर ने 'युको' के आधार पर हराया। इससे पहले रोहित ने मोजाम्बिक के सैमुअल रिबेरो को मात दी थी, लेकिन क्वार्टर फाइनल में साइप्रस के पेट्रोस क्रिस्टोडुलिडेस से हार गए थे।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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