हॉकी विश्व कप में इतिहास रचने से चूका भारत, इंग्लैंड की जीत का सिलसिला बरकरार

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एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के अपने दूसरे मुकाबले में भारत के पास इंग्लैंड को हराकर 32 साल के जीत के सूखे को खत्म करने और इतिहास रचने का मौका था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इंग्लैंड ने भारतीय टीम को 4-2 से शिकस्त दे दी है और जीत का सिलसिला बरकरार रखा है।

indian hocky team
भारतीय हॉकी टीम

एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के अपने दूसरे मुकाबले में भारत के पास इंग्लैंड को हराकर 32 साल के जीत के सूखे को खत्म करने और इतिहास रचने का मौका था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इंग्लैंड ने भारतीय टीम को 4-2 से शिकस्त दे दी है और जीत का सिलसिला बरकरार रखा है।

हाफ टाइम तक आगे रहा भारत, बाद में मैच फिसल गया

जो एम्स्टेलवीन के वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारत इतिहास रचने से चूक गया है। पहले क्वार्टर तक इंग्लिश टीम ने पहला गोल कर लिया था और 1-0 से आगे थी। हालांकि, दूसरे क्वार्टर में भारत ने दमदार वापसी की और दो गोल दागे। हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर मिलने पर दूसरे क्वार्टर में गोल किया। दिलप्रीत सिंह ने दूसरे क्वार्टर में ही एक और गोल करके भारत को 2-1 से आगे कर दिया। हालांकि, तीसरे क्वार्टर में इंग्लैंड की टीम ने दमदार वापसी की और टीम इंडिया से ना सिर्फ गोल की बराबरी की बल्कि दो गोल करते हुए 3-1 से आगे भी हो गई। चौथे क्वार्टर में भारत के पास वापसी करने का मौका था, लेकिन वापसी हो नहीं सकी। इंग्लिश टीम ने एक और गोल करके बढ़त 4-2 से कर ली। अंत के कुछ मिनटों में भारतीय खिलाड़ियों ने काफी कोशिश की, लेकिन मुकाबला फुल टाइम तक 4-2 से समाप्त हुआ। टीम इंडिया के लिए यह शिकस्त विश्व कप में आगे जाने के लिहाज से भारी पड़ सकती है।

पहला मुकाबला जीतकर आमने-सामने थीं दोनों टीमें

मुकाबले से पहले दोनों टीमें तीन-तीन अंकों के साथ मैदान में उतरीं। इस विश्व कप में भारत ने वेल्स को 3-1 से हराकर शुरुआत की, जिसमें हरमनप्रीत सिंह ने दो गोल दागे। वहीं, इंग्लैंड ने पाकिस्तान को 4-1 से हराया। अगले चरण में सिर्फ शीर्ष दो टीमें ही पहुंचेंगी। भारत ने 1994 के बाद से विश्व कप में इंग्लैंड को नहीं हराया है और यह हार का सिलसिला जारी है। हालांकि, टीम इंडिया ने पेरिस ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड को शिकस्त दी थी।

1994 से विश्व कप में इंग्लैंड से नहीं जीता है भारत

भारत का सामना वर्ल्ड रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज इंग्लैंड से हुआ। इंग्लिश टीम के खिलाफ भारत का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। आखिरी बार भारत को 1994 में सिडनी में पांचवें छठे स्थान के मुकाबले में एक गोल से जीत मिली थी। इसके बाद 1998 में दोनों टीमों का सामना नहीं हुआ, लेकिन अगले तीन विश्व कप (2002, 2006 और 2010) में इंग्लैंड ने भारत को 3 -2 के समान अंतर से हराया। 2018 में दोनों टीमों की टक्कर नहीं हुई और 2023 में पिछले विश्व कप में दोनों ने गोलरहित ड्रॉ खेला। इस मुकाबले को जोड़कर अब तक दोनों टीमों के बीच वर्ल्ड कप में कुल 10 मैच खेले गए हैं। जिसमें इंग्लैंड ने 5 मैच जीते हैं जबकि भारत को 3 मैच में जीत मिली है और दो में ड्रॉ रहे।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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विमलेश खेल से जुड़ी तमाम तरह की स्टोरीज पाठकों तक पहुंचाते हैं, जिनमें तथ्यों की स्पष्टता होती है और सकारात्मक विश्लेषण भी शामिल होता है। ये क्रिकेट की दुनिया का अच्छा ज्ञान रखते हैं और राजनीति में गहरी दिलचस्पी है। राजनीति और क्रिकेट में घट रही घटनाओं का विश्लेषण करना उनकी तह तक जाना विमलेश को पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी तथ्यपरकता (Fact-checking) है। चाहे वह चकाचौंध से भरा क्रिकेट जगत हो या अन्य खेल और खिलाड़ियों का जीवन। बतौर खेल पत्रकार यह कसौटी हर वक्त बनी रहनी चाहिए कि लेखन हमेशा प्रमाणिक हो। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचित करना है, बल्कि उन्हें सही और सुरक्षित जानकारी के माध्यम से सशक्त बनाना भी है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सूचना, शिक्षा और मनोरंजन होता है और इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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