हॉकी विश्व कप में पाकिस्तान का दबदबा, जानिए 1971 से 2023 कैसा है भारत का सफर, सिर्फ इतनी बार जीता खिताब

नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा)
Follow us on Google News
share

1971 से 2023 तक के सफर में भारत को एकमात्र सफलता 1975 में कुआलालम्पुर में मिली जब अजित पाल सिंह की कप्तानी वाली टीम ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। पाकिस्तान टूर्नामेंट की सबसे कामयाब टीम रही है।

indian hocky team
भारतीय पुरुष हॉकी टीम का विश्व कप में सफर ( फाइल फोटो)

पुरूष हॉकी विश्व कप की शुरुआत इसी महीने से हो रही है। ऐसे में आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि हॉकी विश्व कप में पिछले पांच दशक में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है।

1971 से 2023 तक के सफर में भारत को एकमात्र सफलता 1975 में कुआलालम्पुर में मिली जब अजित पाल सिंह की कप्तानी वाली टीम ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था, लेकिन उसके बाद से आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारत पोडियम पर जगह बनाने में नाकाम रही है । टूर्नामेंट की सबसे कामयाब टीम पाकिस्तान रही है जिसने चार बार खिताब जीते जबकि नीदरलैंड, आस्ट्रेलिया और जर्मनी तीन तीन बार चैम्पियन रहे । बेल्जियम ने एक बार ट्रॉफी अपने नाम की।

भारत का हॉकी विश्व कप में 1971 से लेकर 2023 तक कैसा रहा प्रदर्शन

1971 बार्सीलोना :

भारत और पाकिस्तान ने मिलकर मार्च 1969 में एफआईएच परिषद की बैठक में फुटबॉल की तर्ज पर हॉकी विश्व कप कराने का प्रस्ताव रखा जिसे अगले साल ब्रसेल्स में हुई बैठक में मंजूरी मिली। पाकिस्तान को मेजबानी दी गई लेकिन 1971 में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते पहला विश्व कप स्पेन के बार्सीलोना में हुआ।

पांच उपमहाद्वीपों की दस टीमों ने एफआईएच के आमंत्रण पर इसमें भाग लिया। ओलंपिक की सबसे कामयाब टीम भारत पूल ए में फ्रांस, अर्जेंटीना, कीनिया और पश्चिम जर्मनी को हराकर शीर्ष पर रहा। सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 2- 1 से हराया और फिर स्पेन को हराकर पहला विश्व कप जीता। भारत ने कीनिया को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता।

1973 एम्सटर्डम :

एम्सटेलवीन के वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस विश्व कप में मेजबान नीदरलैंड ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 4-2 से हराकर खिताब जीता। भारत पूल ए में पांच जीत और तीन ड्रॉ के साथ पश्चिम जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर रहा। सेमीफाइनल में बी पी गोविंदा के गोल के दम पर भारत ने पाकिस्तान को हराया। फाइनल में अतिरिक्त समय तक मैच 2 . 2 से बराबर था लेकिन पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड ने भारत को हराया।

1975 कुआलालम्पुर : (भारत ने पहली बार जीता विश्व कप)

भारतीय हॉकी के विश्व कप इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा गया 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में जब फाइनल में अजित पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को 2 -1 से हराया। फाइनल में पाकिस्तान ने बढ़त बना ली थी लेकिन सुरजीत सिंह ने 44वें और अशोक कुमार ने 51वें मिनट में गोल करके भारत को खिताब दिलाया। पूल चरण में शीर्ष पर रहे भारत ने सेमीफाइनल में मलेशिया को मात दी थी। तब तक सात ओलंपिक स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम का यह पहला विश्व कप खिताब था।

1978 ब्यूनस आयर्स :

गत चैम्पियन भारत बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका और छठे स्थान पर रहा। पूल चरण में भारत ने छह में से तीन मैच जीते और दो गंवाये जिसमें पश्चिम जर्मनी से 7- 0 से मिली हार शामिल थी। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को 3- 2 से हराकर खिताब जीता और आस्ट्रेलिया को कांस्य पदक मिला।

1982 मुंबई :

अपने देश में पहली बार विश्व कप खेलते हुए भारत फिर अंतिम चार में नहीं पहुंच सका और पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा। पाकिस्तान ने अपराजेय रहकर वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल में पश्चिम जर्मनी को 3-1 से हराकर तीसरी बार खिताब जीता। भारत के राजिंदर सिंह सीनियर ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे थे।

1986 लंदन :

इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद 12वें और आखिरी स्थान पर रही लेकिन इसी टीम के एक सितारे मोहम्मद शाहिद ने अपने जबर्दस्त खेल से दुनिया को चौंका दिया। ड्रिबलिंग के जादूगर शाहिद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। आस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि पश्चिम जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा। तीन बार का चैम्पियन पाकिस्तान 11वें स्थान पर रहा।

1990 लाहौर :

राजनीतिक तनाव, मेजबान दर्शकों की आक्रामकता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारतीय टीम ने परगट सिंह की कप्तानी में लाहौर में विश्व कप खेला। भारत दसवें स्थान पर रहा लेकिन इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपा नहीं खोने के कारण एफआईएच 'फेयरप्ले' पुरस्कार भारतीय टीम को मिला।

नीदरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1994 सिडनी:

जूड फेलिक्स की कप्तानी में भारतीय टीम ने कृत्रिम टर्फ पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4 -3 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

इस विश्व कप में पूरी तरह से यूरोपीय टीमों का दबदबा रहा। मेजबान नीदरलैंड ने स्पेन को हराकर तीसरा खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा। धनराज पिल्लै की कप्तानी वाली भारतीय टीम नीदरलैंड में परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही और निराशाजनक नौवें स्थान पर रही ।

2002 कुआलालम्पुर :

पहली बार 16 टीमों की भागीदारी में हुए विश्व कप में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा। भारत नौ मैचों में तीन जीत, एक ड्रॉ और पांच हार के साथ दसवें स्थान पर रहा।

2006 मोंशेंग्लाबाख , जर्मनी :

दिलीप टिर्की की कप्तानी में भारतीय टीम पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी और एकमात्र ड्रॉ दक्षिण अफ्रीका से खेलने के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में राजपाल सिंह के एक गोल से दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2010 दिल्ली :

दिल्ली में हुए इस विश्व कप में खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर पूल चरण में पाकिस्तान को 4 -1 से हराना ही मेजबान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। पूल चरण में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी और आठवां स्थान हासिल किया। आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2 -1 से हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

2014 द हेग :

पूल चरण में बेल्जियम, इंग्लैंड , आस्ट्रेलिया से करारी हार झेलने वाली भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। आकाशदीप सिंह ने टूर्नामेंट में पांच गोल किये। आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 6 . 1 से हराकर खिताब जीता और अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 भुवनेश्वर :

हॉकी के गढ ओडिशा में पहली बार हुए विश्व कप में भारत ने पूल चरण में बेल्जियम जैसे दिग्गज को ड्रॉ पर रोका और दक्षिण अफ्रीका तथा कनाडा को हराकर शीर्ष पर रहा। मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से कड़े मुकाबले में 1-2 से हारकर छठे स्थान पर रही जो कई साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। बेल्जियम ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।

2023 भुवनेश्वर और राउरकेला :

लगातार दूसरी बार अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में भारत पूल चरण में दूसरे स्थान पर रहा। क्रासओवर मैच में न्यूजीलैंड ने उसे पेनल्टी शूट आउट में हराया। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। जर्मनी ने बेल्जियम को शूटआउट में हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

भाषा

मोना पंत

पंत

Vimlesh Kumar Bhurtiya

लेखक के बारे में

Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

खेल पत्रकारिता और पत्रकारिता का उद्देश्य
विमलेश खेल से जुड़ी तमाम तरह की स्टोरीज पाठकों तक पहुंचाते हैं, जिनमें तथ्यों की स्पष्टता होती है और सकारात्मक विश्लेषण भी शामिल होता है। ये क्रिकेट की दुनिया का अच्छा ज्ञान रखते हैं और राजनीति में गहरी दिलचस्पी है। राजनीति और क्रिकेट में घट रही घटनाओं का विश्लेषण करना उनकी तह तक जाना विमलेश को पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी तथ्यपरकता (Fact-checking) है। चाहे वह चकाचौंध से भरा क्रिकेट जगत हो या अन्य खेल और खिलाड़ियों का जीवन। बतौर खेल पत्रकार यह कसौटी हर वक्त बनी रहनी चाहिए कि लेखन हमेशा प्रमाणिक हो। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचित करना है, बल्कि उन्हें सही और सुरक्षित जानकारी के माध्यम से सशक्त बनाना भी है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सूचना, शिक्षा और मनोरंजन होता है और इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

Hindi Newsखेल न्यूज़हॉकी वर्ल्ड कपहॉकी विश्व कप में पाकिस्तान का दबदबा, जानिए 1971 से 2023 कैसा है भारत का सफर