
ऑस्ट्रेलिया छोड़ क्यों भारत के हो गए फुटबॉलर रेयान विलियम्स, एक बड़ा मकसद बताया
संक्षेप: ऑस्ट्रेलिया के फुटबॉलर रेयान विलियम्स ने भारत की तरफ से खेलने के लिए अपनी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता छोड़ दी है। अब वह भारतीय नागरिक बन चुके हैं और उन्हें भारतीय पासपोर्ट भी मिल चुका है। वह अंडर 20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने 18 नवंबर को ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ एएफसी एशियाई कप क्वालीफायर से पहले लगने वाले राष्ट्रीय शिविर में विदेश में बसे दो खिलाड़ियों रेयान विलियम्स और अभिनीत भारती को शामिल किया है। विलियम्स ने तो भारत की तरफ से फुटबॉल खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता छोड़ दी है। वह 2013 में अंडर-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अभिनीत भारती एक भारतीय नागरिक हैं और ब्राजील में रहते हैं।

भारत से शुरू से रहा खास कनेक्शन
विलियम्स ने ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता छोड़कर भारत की नागरिकता लेने के पीछे अपना मकसद बताया है। भारत से प्यार तो वजह है ही, एक बड़ी वजह एक वादे को पूरा करना है। उनके नाना भारतीय थे और जब वह जीवित थे तो एक बार विलियम्स से कहा कि प्लीज जाओ और भारत के लिए खेलो। अब विलियम्स अपने नाना का सपना पूरा करने जा रहे हैं। भारत की राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का उनका सपना जल्द ही सच होने जा रहा है।
भारत और टीम के लिए अपना सब कुछ झोंक दूंगा: विलियम्स
विलियम्स ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया है कि भारत के लिए खेलना उनके लिए गर्व की बात होगी। जब वह भारत की जर्सी पहनेंगे तब देश के लिए अपना सब कुछ झोंक देंगे। टीम के लिए अपना सब कुछ झोंक देंगे। उनका मकसद अब भारतीय टीम के लिए अपना बेस्ट देना है और भारतीय फुटबॉल को एक मुकाम पर पहुंचाना है।
विलियम्स का भारत में ननिहाल, नाना भी थे फुटबॉलर
विलियम्स के नाना लिंकन एरिक ग्रोस्टेट भारतीय थे। वह भी फुटबॉल खेलते थे और मुंबई में फुटबॉल जगत के एक बड़े नाम थे।
भारतीय फुटबॉल में एक नए अध्याय की शुरुआत
विदेश में रह रहे खिलाड़ियों और प्रतिभाओं को मौका देने का यह कदम भारतीय फुटबॉल के लिए एक नयी शुरुआत हो सकती है जो महासंघ के रवैये में बड़ा बदलाव दिखाता है। यह कदम भारतीय मूल के खिलाड़ियों और विदेशी नागरिकता छोड़ने के इच्छुक खिलाड़ियों के लिए देश का प्रतिनिधित्व करने का रास्ता खोलता है।
शिविर बृहस्पतिवार से बेंगलुरु में शुरू हो चुका है और उम्मीद है कि दोनों खिलाड़ी जल्द ही इसमें शामिल होंगे। अगर सब ठीक रहता है तो दोनों खिलाड़ी 18 नवंबर के क्वालीफायर के लिए ढाका में टीम में शामिल हो जाएंगे।
2023 में बेंगलुरु एफसी में शामिल हुए थे विलियम्स
पर्थ में जन्मे 31 साल के मिडफील्डर विलियम्स ने अंडर-20 और अंडर-23 स्तर पर ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया है। वह 2019 में दक्षिण कोरिया के खिलाफ एक मैत्री मैच में दूसरे हाफ में स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर सीनियर टीम के लिए भी खेले थे। 2023 में उन्होंने पूर्व आईएसएल चैंपियन बेंगलुरु एफसी में शामिल होने से पहले इंग्लिश क्लब फुलहम और पोर्ट्समाउथ का भी प्रतिनिधित्व किया।
इस साल के शुरु में उन्होंने अपना ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट छोड़कर भारतीय नागरिकता लेने की इच्छा जताई थी और हाल में उन्हें अपना भारतीय पासपोर्ट मिल गया है।
सुनील छेत्री ने की थी खास पहल
एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने कहा कि यह विचार सबसे पहले भारतीय स्टार सुनील छेत्री ने इस साल मई में कोलकाता में राष्ट्रीय शिविर के दौरान दिया था। उन्होंने कहा, ‘सुनील छेत्री ने सबसे पहले रेयान विलियम्स के बारे में जानकारी दी थी जो अपना ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट छोड़कर भारत के लिए खेलना चाहते हैं। तभी से यह प्रक्रिया शुरू हुई।’
महासंघ ने फिर सरकार की मदद से जरूरी कागजी कार्रवाई शुरू की। चौबे ने इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए युवा मामले और खेल मंत्रालय विशेषकर खेल मंत्री मनसुख मांडविया को श्रेय दिया।
ब्राजील में रहते हैं अभिनीत भारती
वहीं 27 साल के डिफेंडर भारती ब्राजील में रहने वाले भारतीय नागरिक हैं और बोलिविया के प्रथम श्रेणी क्लब ‘एकेडेमिया डेल बलोमपी बोलिवियानो’ के लिए खेलते हैं।
भारती नई दिल्ली में शास्त्री एफसी से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद सिंगापुर में गेलंग इंटरनेशनल की युवा टीम में शामिल हो गए। वह पोलैंड, पुर्तगाल, मैक्सिको, अर्जेंटीना, चेक गणराज्य और बोलीविया में खेलने के साथ 2019-20 इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में केरल ब्लास्टर्स के लिए भी खेले।
चौबे ने कहा, ‘हमें उनके बारे में ब्राजील में भारतीय दूतावास से पता चला। फिर हमने उन्हें राष्ट्रीय शिविर में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।’
उन्होंने कहा, ‘हम दुनिया के दूसरे हिस्सों में विशेषकर फुटबॉल खेलने वाले देशों में पहुंचने की कोशिश करेंगे जहां भारतीय पासपोर्ट रखने वाले खेल रहे हैं। राष्ट्रीय टीम को मजबूत बनाने के लिए हम उनसे संपर्क करके आमंत्रित करना चाहेंगे।’
एएफसी एशियाई कप 2027 की दौड़ से बाहर होने के बाद भारत जीत से टूर्नामेंट खत्म करना चाहेगा।
(भाषा से भी इनपुट)

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