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12 अक्तूबर, 2020|10:44|IST

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क्या आपने अपने बच्चे को घातक मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस के खिलाफ टीका लगवाया है?

नई दिल्ली के एक लोकप्रिय अस्पताल में, दिसंबर, 2018 की ठंडी सुबह में एक 4-वर्षीय लड़का अपने परेशान माता-पिता द्वारा लाया गया था। उन्हें कुछ समझ नहीं रहा था कि उसे क्या हो गया था। दंपति ने बताया कि पिछले कुछ घंटों में, बच्चे में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दिए थे जैसे कि बुखार, सिरदर्द, मतली, भूख लगना आदि। उस विशेष सुबह, उसने अपने माता-पिता की बातों का जवाब देना बंद कर दिया था और मानसिक भ्रम के लक्षण दिखा रहा था। इससे उनके खतरे का आभास हुआ और माता-पिता ने उसे तुरंत अस्पताल ले जाने का फैसला किया। बच्चे की जांच करने और माता-पिता से बात करने के बाद, डॉक्टर ने उसके रक्त और मस्तिष्कमेरु द्रव के नमूनों का परीक्षण करने के लिए कहा। शाम तक, डॉक्टर के सबसे बुरे संदेह की पुष्टि हो गई थी। बच्चे को दुर्लभ मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस हो गया था। डॉक्टर और उनकी टीम ने तुरंत कार्यवाई की और तेजी से किये गए निदान और पेनिसिलिन, एम्पीसिलीन और सेफ्ट्रिएक्सोन सहित उचित एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के कारण इस छोटे बच्चे के जीवन को बचाने में कामयाब रहे। लेकिन हर कोई इतना भाग्यशाली नहीं होता है!

मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस लक्षणों की शुरुआत के बाद से 24 से 48 घंटे के भीतर मौत का कारण बन सकता है। यदि अनुपचारित रहता है तो, मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस 50% मामलों में घातक है और इसके परिणामस्वरूप 10% से 20% बचे हुए लोगों में मस्तिष्क क्षति, श्रवण हानि या विकलांगता हो सकती है। आपके पता लगने से पहले ही, रोगी इस घातक बीमारी के खिलाफ अपनी लड़ाई हार सकता है।

लेकिन इसकी शुरुआत को रोकना संभव है। अधिक जानने के लिए आगे पढ़े।

मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस क्या है?

मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिसमेनिन्जाइटिस का एक जीवाणु रूप है, जो मेनिनजाइटिस नामक महीन परत में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को घेर लेता है। मेनिंजोकोकल मेनिन्जाइटिस, जो नीसेरिया मैनिंजाइटीडीस बैक्टीरिया के कारण होता है, यह एक बड़ी महामारी पैदा करने की इसकी क्षमता के कारण विशेष महत्व रखता है। नीसेरिया मैनिंजाइटीडीस केवल मनुष्यों को संक्रमित करता है; इसका पशु परकोई फर्क नहीं पड़ता है। इसके जीवाणु एक व्यक्ति-से- दूसरे व्यक्ति में श्वसन या गले के स्राव की बूंदों के माध्यम से संक्रामित होते हैं। धूम्रपान, घनिष्ठ और लंबे समय तक रहने वाले संपर्क - जैसे चुंबन, किसी पर छींकने या खांसने, या एक वाहक के साथ करीबी व्यवस्था में रहने सेइस बीमारी के संक्रामित होने में मदद मिलती है। जबकि मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों को प्रभावित करता है; यह दुनिया में कहीं भी, किसी को भी प्रभावित कर सकता है।

लक्षण और उपचार

शुरुआती लक्षण भ्रामक हो सकते हैं क्योंकि वे स्वभाव में फ्लू जैसे होते हैं जैसे कि चिड़चिड़ापन, बुखार, भूख लगना आदि। मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस के क्लासिक संकेतों में बुखार, सिरदर्द और गर्दन में अकड़न  होना शामिल है। अन्य लक्षणों में मतली, उल्टी, फोटोफोबिया (प्रकाश के प्रति संवेदनशील होना) और मानसिक भ्रम शामिल हैं। मेनिंजोकोकल मेनिन्जाइटिस का निदान करने के लिए, निसेरिया मेनिन्जाइटिस बैक्टीरिया के उपस्थिति की जांच के लिए रक्त या मस्तिष्कमेरु द्रव के नमूनों का परीक्षण  किया जाता है।

तेजी से किये जाने वाला और एंटीबायोटिक दवाओं के साथ उपचार अनिवार्य होता है। एहतियात के तौर पर, मेनिंगोकोकल बीमारी से संक्रमित किसी भी व्यक्ति के साथ निकट संपर्क में रह रहे लोगो को भी संक्रमण से बचाने में मदद करने के लिए एंटीबायोटिक्स लेनी चाहिए। संक्रमण की गंभीरता के अनुसार, मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस वाले लोगों को अन्य अन्य उपचार की आवश्यकता हो सकती है जिसमें  ब्रीथिंग सपोर्ट, कम रक्तचाप के इलाज के लिए दवाएं और क्षतिग्रस्त त्वचा वाले क्षेत्रों के घावों की देखभाल आदि शामिल है।

टीकाकरण मेनिंगोकोकल मेनिन्जाइटिस को रोकने में मदद कर सकता है

मेनिंगोकोकल बीमारी के खिलाफ लाइसेंस प्राप्त टीके 40 से अधिक वर्षों से उपलब्ध हैं। समय के साथ, स्ट्रेन कवरेज और वैक्सीन की उपलब्धता में बड़े सुधार हुए हैं, लेकिन आज तक मेनिंगोकोकल बीमारी के खिलाफ कोई सार्वभौमिक वैक्सीन मौजूद नहीं है। टीके सेरोग्रुप विशिष्ट होते हैं और अलग-अलग डिग्री की सुरक्षा की अवधि  प्रदान करते हैं। भारत में उपलब्ध मेनिंगोकोकल कंजुगेट वैक्सीन भारत में प्रचलित 4 ज्ञात सेरोग्रुप के विरूद्ध कवरेज देती है, जो कि भारत में काफी प्रचलित हैं। यह समझना जरूरी है कि यह बीमारी, जिसकी घटित होने बेहद काम होता है, वह जानलेवा हो सकती है और 24 घंटे में मौत का कारण भी बन सकती है। यहां तक ​​कि अगर बीमारी से स्वास्थ्य लाभ होता भी है, तब भी व्यक्ति के साथ गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। एमसीवी के माध्यम से इसे रोकना संभव है। एमसीवी वैक्सीन को 9 महीने की उम्र के बाद से शिशुओं को 2 खुराक के रूप में दी जा सकती है।