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25 जुलाई, 2020|1:35|IST

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सभी सड़कें आणंद की ओर ले जाती हैं - जहाँ हुई थी भारत की दुग्ध क्रांति की उत्पति

क्या सुबह की एक कप चाय या रात में सोते समय एक गिलास दूध के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना संभव है?  वह वस्तु, जो आज आसानी से उपलब्ध है, इसका बहुत बड़ा श्रेय डॉ. वर्गीस कुरियन को जाता है, जिन्हें 'द मिल्कमैन ऑफ इंडिया' के रूप में जाना जाता है। उन्होंने गुजरात के खेड़ा  जिले के एक छोटे से गाँव - आणंद में किसानों के शोषण को समाप्त करने के लिए एक क्रांतिकारी आंदोलन चलाया था। तब से, आणंद और डॉ. कुरियन दोनों आज हमारे जीवन में अपने इस कार्य के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं!

26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर, जो डॉ. कुरियन का  जन्मदिन भी है| अमूल ने एक बाइक रैली का आयोजन किया है, जिसमें 50 सवार 12 दिनों के लिए वाराणसी से आणंद की यात्रा करते हुए 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे।

रैली का तीसरा संस्करण, #KashiToKaira, वाराणसी से शुरू होता है और डेयरी उद्योग में डॉ. कुरियन के योगदान को चिह्नित करने के लिए आणंद में समाप्त होता है। रैली को पूरी धूमधाम के बीच 15 नवंबर को वाराणसी के पराग डेयरी प्लांट से रवाना किया जाएगा। प्रयागराज शहर में जाने से पहले उनका पहला पिट स्टॉप गोपीगंज है।

अगली सुबह, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के शांत पानी की आवाज़ के साथ उठने के बाद, बाइकर्स नवाबों के शहर लखनऊ के लिए रवाना होने की तैयारी करेंगे। यह शहर कबाब और बिरयानी सहित अपनी शानदार वास्तुकला और मनोरम भोजन के लिए जाना जाता है।

अगला दिन लखनऊ दर्शन के लिए रखा गया है जिसमें अम्बेडकर मैदान, रिवर फ्रंट, विधानसभा, भुल भुलैया, ये सभी पर्यटन स्थल शामिल हैं। इसके बाद, सवार बनासकांठा जिले के लखनऊ मिल्क पैकेजिंग यूनिट, पालनपुर - अमूल दूध उत्पादों की एक श्रृंखला के निर्माता के पास जाएंगे।

लखनऊ में एक दिलचस्प घटनाओं से भरे दिन के बाद, सवार कानपुर की ओर मार्च करने करेंगे। समूह मोती झील, और उसके बाद, खूबसूरत श्री राधा कृष्ण जेके मंदिर पर रुकेगा, जहां से वे कानपुर में अमूल बनास डेयरी पर जाएंगे। सवार प्लांट के परिसर में पेड़ भी लगाएंगे।

इसके बाद की योजना महेवा तक पहुंचने की है, जहां उनका स्वागत इटावा के किसानों द्वारा किया जाएगा। किसान समुदाय डॉ. कुरियन के लिए दिल से महसूस करता है, क्योंकि इन दूरदर्शी ने उनका उत्थान करने के लिए बहुत कार्य किया था! यहां से सवारियां ताजमहल की भूमि आगरा की ओर प्रस्थान करेंगी।

गुजरात में प्रवेश करने से पहले, मध्य प्रदेश में ग्वालियर, गुना, भोपाल और aउज्जैन को कवर करने में बिताए जाएंगे। सवार लोगों के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ओर बढ़ने से पहले, उनका पहला गंतव्य गोधरा होगा, और अंत में वे डॉ. कुरियन के जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए अपने अंतिम बिंदु - आणंद पहुंचेंगे।

 

 

 

पिछले दो संस्करणों - 2018 और 2017 में - डॉ. कुरियन के जीवन और विरासत को उजागर करने के लिए सवारियों को देश में यात्रा करते देखा गया है। आणंद में यात्रा का समापन करने से पहले 2017 में आयोजित रैली के पहले संस्करण को केरल के कोझिकोड से रवाना किया गया था और मैंगलोर, गोवा, कोल्हापुर, पुणे, विरार और वडोदरा को कवर किया गया था।

दूसरी ओर, पिछले वर्ष आयोजित किए गए दूसरे संस्करण में दो मार्ग थे - एक उत्तर भारत से था और दूसरा गुजरात से। वह जिसकी शुरुआत उत्तर भारत से करी गयी थी, वह जम्मू में शुरू हुआ था और अमृतसर, चंडीगढ़, दिल्ली, फरीदाबाद, जयपुर, अजमेर, उदयपुर, हिम्मतनगर, मेहसाणा शहर और अंत में, आणंद जैसे शहर को कवर किया गया था।

गुजरात मार्ग छोटा था और कच्छ के रण से शुरू हुआ और राजकोट, जूनागढ़, भावनगर, मेहसाणा को कवर करते हुए और आणंद में समाप्त हुआ था।

इन सभी संस्करणों में ऐसे सवारों की भागीदारी देखी गई है, जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं और डॉ. कुरियन को श्रद्धांजलि देने के लिए एक साथ आते हैं। आखिरकार, यह उनका अरब-लीटर का विचार है जिसने दुनिया के सबसे बड़े कृषि कार्यक्रम के विकास को प्रेरित किया और डेयरी फार्मिंग को इंडिया में को सबसे बड़ा आत्मनिर्भर उद्योग बना दिया।

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