DA Image
4 जून, 2020|4:39|IST

अगली स्टोरी

  • दिल्ली तक गुहार, अब आंदोलन

    आरबीएचएम जूट मिल को चालू कराने के लिए दिल्ली तक गुहार लगा चुके है लेकिन अब आंदोलन होगा। रविवार को मजदूर संघ इंटक की कार्यकारिणी बैठक...

  • shashi shekhar

    मेट्रो में बैठा नई उम्र की नई फसल मार्का वह जोड़ा देर से चुहल कर रहा था। उनकी बातचीत का विषय क्रिसमस और नववर्ष पर अधिक से अधिक ‘मस्ती’ करना था। रह-रहकर उनके फोन घनघनाते, वाट्सएप संदेश आते...

  • बहुत दिनों बाद खुशनुमा हवा के झोंके की तरह किन्हीं शकील अहमद साहब का मेल आया...

  • हमारी धरोहर हम संभालेंगे

    छोटी सी ही वस्तु क्यों न हो, यदि तुम्हें अच्छी लगती है तो तुम उसे आगे तक के लिए संभाल कर रखते हो। नहीं चाहते कि तुम्हारी उस जरूरी वस्तु को कोई भी नुकसान पहुंचाए। इसी तरह दुनियाभर में भी सुंदर और...

  • 10 साल में बना था लाल किला

    दिल्ली का लाल किला राष्ट्रीय महत्व की इमारत तो है ही, यूनेस्को ने भी इसे 2007 में विश्व धरोहर घोषित कर दिया है। आओ आज जानते हैं इस विशाल किले के बारे में सत्य सिंधु से इस किले में आम आदमी के लिए...

  • हमारे देश में सबसे अधिक प्रोत्साहन उस वर्ग को मिलना चाहिए, जो सबसे अधिक उपेक्षित है। जी हां, हमारे देश में सफाई के काम को हेय दृष्टि से देखा जाता है, जबकि यह काम करने वाले देशवासियों के स्वास्थ्य के...

  • कई दिनों पहले के गुलाल के कारण मौलाना की सफेद दाढ़ी अब भी गुलाबी नजर आ रही थी। एक तगड़ी डकार फेंक कर बोले, ‘भाई मियां, कानी के ब्याह में नौ-सौ नखरे। यह बुढ़ापे का हाजमा और हर घर से...

  • नर्सरी में अपने बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए आजकल अभिभावकों को घंटों लाइन में खड़े होना पड़ रहा है। कई स्कूलों ने तो पहले ही दिन फॉर्म खत्म हो जाने का बोर्ड लगा दिया है। कई स्कूल वाले एडमिशन फॉर्म...

  • राजनेताओं में कीचड़ उछालने का खेल जारी है। एक कहता है कि तू माल खा गया, तो दूसरा कहता है कि तू मुझसे ज्यादा खा गया। लड़ाई खाने की चल रही है। कोई कहता है कि मुझे मुख्यमंत्री बनाओ, कोई कहता है कि...

  • मौसम ही ऐसा है। कभी गरमी, कभी सर्दी। डकैत पहने हैं पुलिस की वर्दी। कुछ हैं, जो बिहारी पासवान की तरह रोते हुए आसमान देख रहे हैं। कुछ चुनावी खाज मिटा रहे हैं, कुछ लालूजी की तरह दांत किटकिटा रहे हैं।...

  • हे मेरे प्रिय छुटभय्ये! तू तनाव में क्यूं है। तू मुझे भाजपा-सपा से निकाला हुआ सा लगता है। खून के घूंट मत पी। घर वापसी की अफवाहें फैला। महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर लेकिन बच-बच के। राजनीति में कोई...

  • यद्यपि गंजत्व हास्य का विषय है, तथापि खल्वाट खंभ केपी सक्सेना ने ‘नक्कारखाना’ में इसकी बाबत अपनी कलम की कैंची चलाकर हिंदी व्यंग्य साहित्य की खोपड़ी पर एक नए विमर्श के उगने का मार्ग...

  • मैं उनके घर पहुंचा तो देखा कि मौलाना लादेन टीवी में यों आखें गड़ाए हैं, जैसे संसदीय चुनावों के रिजल्ट देख रहे हों। पर्दे पर ‘बीड़ी जलाइले पिया..’ का डांस चल रहा था।  मैंने धीरे से...

  • पैसे लेकर खिलाड़ी को खेल के मैदान में उतारने की बात पहली बार सामने आकर सार देश को चौंकाया है। यह बात न केवल हॉकी फेडरशन, बल्कि समूचे देश के लिए शर्मनाक है। इस प्रकरण से यह भी साबित होता है कि हॉकी की...

  • पांच मार्च को प्रकाशित गफूर ‘स्नेही’ का नक्कारखाना ‘गरीबों का आर्केस्ट्रा है ढोल’ काफी रोचक लगा। ढोल का अपना ही महत्व है। पंच परमेश्वर की बैठकों का सूचक है ढोल, गांव-कस्बों में मुनादी का मंत्र है...

माफ़ कीजिए आप जो खबर ढूंढ रहे हैं , वह उपलब्ध नहीं है

माफ़ कीजिए आप जो खबर ढूंढ रहे हैं , वह उपलब्ध नहीं है

चुटकुले

जब पत्नी ने कहा, मैं तुम्हे ऑफिस नही जाने दूंगी

पत्नी:- लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी मैं तुम्हे ऑफिस नही जाने दूंगी।

पति:- क्यों?
😜
पत्नी:- मुझें कामवाली से ज्यादा तुम्हारा काम अछा लगा।